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वाचिक परम्परा को लिपिबद्ध करना समाज के लिए सराहनीय कदम

by Bhupendra Sahu

रायपुर नवा रायपुर में तीन दिवसीय जनजाीतय वाचिकोत्सव 2023 का आज समापन हुआ। आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान की संचालक श्रीमती शम्मी आबिदी ने वाचिकोत्सव में प्रदेशभर से हिस्सा लेने वाले जनजातीय समुदाय के प्रबुद्धजनों को स्मृति चिन्ह एवं प्रमाण पत्र भेंटकर सम्मानित किया। आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, नवा रायपुर द्वारा भारत सरकार जनजातीय कार्य मंत्रालय एवं छत्तीसगढ़ सरकार के सहयोग से कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

जनजातीय वाचिकोत्सव 2023 के अंतिम दिवस जनजातियों में गोत्र व्यवस्था एवं गोत्र चिन्हों की अवधारणा तथा जनजातियों की विशिष्ट परम्पराएं, रीति-रिवाज एवं विश्वास संबंधी सत्र का पृथक-पृथक संचालन हुआ। जिसमें प्रदेशभर से आए हुए जनजातीय वाचकों ने विषय पर आधारित वाचिक ज्ञान पर अपना अनुभव साझा किया। जनजातीय समाज के प्रबुद्धजनों ने अपने वाचिक ज्ञान को साझा करने के साथ-साथ जनजातीय समाज की समााजिक एवं धार्मिक व्यवस्था में इनके महत्व पर प्रकाश डाला।
टीआरटीआई भवन, नवा रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में अध्यक्षता कर रहे विषय विशेषज्ञ श्री शेर सिंह आचला ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार एवं आदिम जाति कल्याण विभाग के द्वारा हमारे पूर्वजों के वाचिक परम्परा को लिपि के रूप में समाहित करने के लिए जो अभियान चलाया गया है, वह एक सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि इस वाचिकोत्सव में प्रदेशभर के जनजातीय समुदाय के प्रबुद्धजनों ने हमारे पूर्वजों के द्वारा समाज को बताई गई कथा, कहानी, लोकोक्तियां, देवी-देवताओं की स्तुति हमारे समाज में पीढ़ी दर पीढ़ी वाचिक परंपरा का आदिकाल से निर्वहन किया जा रहा है। इस वाचिक परम्परा को लिपिबद्ध करना जनजातीय समाज के लिए बहुत उपयोगी होगा।
इस अवसर पर श्री बी.एल कोर्राम, श्रीमती उषा लकड़ा, निर्मल बघेल, आदिमजाति अनुसंधान विभाग के अनुसंधान अधिकारी डॉ. राजेंद्र सिंह, संयुक्त संचालक प्रज्ञान सेठ एवं जनजातीय समुदाय के प्रदेशभर से आए हुए लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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