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निमोनिया क्या है? जानिए इस बीमारी के कारण, लक्षण और इलाज

by Bhupendra Sahu

निमोनिया फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने वाला एक गंभीर रोग है। यह शिशुओं से लेकर बुजुर्गों तक, किसी को भी हो सकता है। यह रोग संक्रामक होता है और घातक भी हो सकता है, इसलिए इससे पीडि़त होने पर रोगी को अधिक सावधानी बरतनी होती है। आइए आज निमोनिया रोग से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें जानते हैं ताकि इस रोग को पहचान कर इसका जल्द इलाज किया जा सके।

बैक्टीरिया और वायरस से होने वाला संक्रमण है निमोनिया
निमोनिया एक संक्रामक रोग है, जिसमें सबसे ज्यादा फेफड़ों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह रोग वायरस, बैक्टीरिया या फंगल के संक्रमण के कारण होता है। इससे फेफड़ों में मौजूद ऊतकों में सूजन हो जाती है, जिससे उनमें मवाद या तरल पदार्थ भर जाता है। यह रोग एक या दोनों फेफड़ों में हो सकता है और इसकी जटिलताओं को दूर करने के लिए तुरंत इलाज की जरूरत होती है।
निमोनिया होने के क्या कारण हैं और यह कैसे फैलता है?
निमोनिया होने का मुख्य कारण वायरस, बैक्टीरिया या फंगल का संक्रमण है। इसके अलावा कुछ अन्य बीमारियां भी हैं, जिनसे निमोनिया हो सकता है। इनमें सामान्य सर्दी, कोरोना वायरस, इंफ्लुएंजा, लेजिओनेरेस रोग और न्यूमोकोकल रोग शामिल हैं। निमोनिया अपने आप में संक्रामक नहीं होता है, लेकिन इसके बैक्टीरिया और वायरस संक्रामक होते हैं। इस वजह से यह खांसी, छींक या संक्रमित सतह से भी फैल सकता है। इसके बचाव के लिए आपको सावधान रहने की जरूरत होती है।
निमोनिया के लक्षण क्या हैं?
निमोनिया से पीडि़त लोगों को 105 डिग्री तक तेज बुखार हो सकता है। इसके अलावा सीने और पेट में दर्द, खांसी, खून वाली खांसी, थकान महसूस करना, सांस लेने में दिक्कत, पसीना आना या ठंड लगना, दिल की धड़कन तेज हो जाना भी इस रोग के लक्षणों में शामिल समस्याएं हैं। इसमें पीडि़त को भूख में कमी, त्वचा या नाखूनों का नीला पड़ जाना, शरीद में दर्द और मानसिक थकावट का भी अनुभव हो सकता है।
निमोनिया का इलाज क्या है?
निमोनिया का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसके किस प्रकार से पीडि़त हैं। डॉक्टर बैक्टीरिया के कारण निमोनिया होने पर एंटी-बायोटिक्स, फंगल के कारण होने पर एंटी-फंगल और वायरस के कारण होने पर एंटी-वायरल दवाएं देते हैं। इसके अलावा यदि पीडि़त इंसान ठीक से सांस नहीं ले पाता है तो उसे नाक या मुंह में एक ट्यूब के जरिए ऑक्सीजन थेरेपी पर रखा जाता है और खाने-पीने के लिए सिर्फ तरल पदार्थ दिया जाता है।
निमोनिया से बचाव के उपाय
इस जानलेवा रोग से बचने के लिए कुछ सावधानियां बरतना जरूरी और अच्छा है। इसके लिए अपने हाथों पर बार-बार धोएं, वैक्सीनेशन करवाएं और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखने के लिए स्वस्थ खाना खाएं और एक्सरसाइज करें। इसके अलावा धूम्रपान न करें क्योंकि यह फेफड़ों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। निमोनिया के रोगी के संपर्क में आने से बचें। यदि रोगी के आसपास हों तो मुंह पर मास्क लगाकर रखें।
निमोनिया से बचाव के लिए कुछ घरेलू नुस्खे
निमोनिया से बचाव और जल्दी राहत के लिए आप कुछ घरेलू नुस्खों को भी आजमा सकते हैं। 1) गुनगुने दूध में हल्दी मिलाकर पीएं। हल्दी में कर्क्यूमिन नामक एक पोषक तत्व होता है, जो एंटी-इंफ्लेमेटरी, इम्यूनोमॉड्यूलेटरी और एंटी-बायोटिक गुणों से समृद्ध होता है। 2) मेथी की चाय पीएं। मेथी एक शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट के रूप में काम करके जुकाम और खांसी जैसे निमोनिया के लक्षणों को कम करती है। 3) सब्जियों का जूस प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है।
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