नई दिल्ली। पिछले पांच कारोबारी सत्रों में उछाल के बाद सोने की कीमतें आने वाले दिनों में और बढ़ सकती हैं। इसकी प्रमुख वजह सोने के कम आयात के अलावा चीन और तुर्किये हैं। हालांकि, बढ़ी कीमतों का असर त्योहारी सीजन में सोने की खरीदारी पर नहीं पड़ेगा।
दरअसल, भारत में सोने की ज्यादातर आपूर्ति आईसीबीसी स्टैंडर्ड बैंक, जेपी मॉर्गन और स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक करते हैं। ये त्योहारी सीजन में ज्यादा सोना मंगाकर अपने पास रख लेते हैं। हालांकि, कम प्रीमियम मिलने की वजह से ये बैंक भारत की सोने की आपूर्ति में कटौती कर रहे हैं। वे ज्यादा कीमत के लिए चीन व तुर्किये को सोना बेच रहे हैं।
ऐसे में त्योहारी सीजन में देश में सोने की कमी से कीमतों में तेजी आ सकती है। केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया ने कहा, आपूर्ति में कटौती और आयात में कमी से सोने की कीमतें अभी के 52,000 से बढ़कर दिवाली तक 53,000 तक पहुंच सकती हैं।
इसके बावजूद पीली धातु के दाम 2020 के मुकाबले करीब 3,000 कम ही रहेंगे। उस समय सोना 56,000 के स्तर पर था। इसके अलावा, धनतेरस और दिवाली जैसे त्योहारी सीजन में लोग सोना खरीदना शगुन मानते हैं। इन वजहों से खरीदारी पर खास असर नहीं दिखेगा।
दाम बढ़ाने में चीन-तुर्किये की भूमिका
भारत में अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क कीमत की तुलना में सोने का प्रीमियम केवल एक से दो डॉलर रह गया है, जो पिछले साल त्योहारी सीजन में चार डॉलर था। चीन में 20 से 45 डॉलर तक प्रीमियम इन बैंकों को मिल रहा है। तुर्किये में 80 डॉलर तक प्रीमियम मिल रहा है। एक बैंक के अधिकारी का कहना है कि बैंक वहीं सोना बेचेंगे, जहां उन्हें ज्यादा भाव मिलेगा। अभी चीन और तुर्किये ज्यादा प्रीमियम दे रहे हैं।