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दिल्ली में पटाखों पर बैन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे बीजेपी सांसद मनोज तिवारी, याचिका पर 10 अक्टूबर को होगी सुनवाई

by Bhupendra Sahu

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी सांसद मनोज तिवारी की राजधानी दिल्ली में पटाखों पर बैन के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के लिए शुक्रवार को सहमति जताई। तिवारी ने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के स्तर को रोकने के लिए सभी प्रकार के पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री पर रोक के दिल्ली सरकार के फैसले को चुनौती दी है। दरअसल, दिल्ली की आप सरकार ने 7 सितंबर को राजधानी में तत्काल प्रभाव से 1 जनवरी 2023 तक पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

वकील शशांक शेखर झा द्वारा तत्काल सुनवाई के लिए मनोज तिवारी की याचिका का उल्लेख करने के बाद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया यूयू ललित की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि वह इस मुद्दे पर 10 अक्टूबर को सुनवाई करेगी। सीजेआई ललित ने कहा कि सूची 10 अक्टूबर को, दीवाली से पहले है।
सभी राज्यों में दंडात्मक कार्रवाई पर रोक की मांग
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को आगामी त्योहारी सीजन के दौरान जायज पटाखों की बिक्री, खरीद और फोडऩे के संबंध में नए दिशानिर्देश जारी करने का निर्देश देने की मांग की है। तिवारी ने सभी राज्यों को यह निर्देश देने की भी मांग की है कि वे पटाखों की बिक्री या उपयोग करने वाले आम लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने जैसी कोई दंडात्मक कार्रवाई न करें।
याचिका में 2021 के फैसले का भी किया जिक्र
वकील अश्विनी कुमार दुबे और शशांक शेखर झा के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है, जीवन के अधिकार के नाम पर, धर्म की स्वतंत्रता को छीना नहीं जा सकता है और एक संतुलन बनाना होगा जैसा कि इस अदालत के 29 अक्टूबर, 2021 के फैसले के माध्यम से किया गया है।
2021 में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि पटाखों के उपयोग पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है और केवल वे आतिशबाजी जिनमें बेरियम लवण होते हैं, प्रतिबंधित हैं। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने उन पटाखों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया था, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाए जाते हैं, जबकि यह स्पष्ट किया है कि पटाखों पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है और लोग अपना त्योहार मनाने के लिए जायज पटाखों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

याचिका में कहा गया है कि कई राज्य सरकारों और उच्च न्यायालयों ने 2021 में सुप्रीम कोर्ट के रुख के विपरीत आदेश पारित किए और पटाखों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था। याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद, कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने दीपावली के जश्न की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए और एफआईआर दर्ज की और कर्फ्यू लगा दिया।
याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार ने आम नागरिकों के खिलाफ 210 एफआईआर दर्ज कीं और पुलिस ने पटाखे फोडऩे के आरोप में 143 लोगों को गिरफ्तार किया, जबकि 125 एफआईआर दर्ज की और 138 लोगों को (पटाखे) बेचने के आरोप में 28 सितंबर, 2021 से 4 नवंबर, 2021 के बीच गिरफ्तार किया था।

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