नई दिल्ली / लोकसभा में विपक्ष ने बुधवार को कांग्रेस के चार सांसदों का निलंबन रद्द करने की मांग की। इस पर सरकार ने जोर देकर कहा कि इसे वापस लिया जा सकता है बशर्ते विपक्षी सदस्य यह आश्वासन दें कि वे सदन में वेल में प्रवेश नहीं करेंगे और तख्तियां नहीं दिखाएंगे। यह मांग राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने की थी। कांग्रेस के सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे। जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग के खिलाफ विजय चौक पर विरोध प्रदर्शन करने के बाद कई कांग्रेस सांसदों को हिरासत में लिया गया है।
प्रह्लाद जोशी बोले, विपक्ष को देनी होगी गारंटी
विपक्षी सदस्यों की अपील का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि स्पीकर की अनुमति से हम निलंबन हटाने को तैयार हैं, लेकिन क्या आप इस बात की गारंटी लेने के लिए तैयार हैं कि वे तख्तियां लेकर सदन और वेल में नहीं आएंगे। सुबह दो बार बाधित होने के बाद दोपहर दो बजे सदन की बैठक हुई। इस दौरान राकांपा नेता सुप्रिया सुले ने कहा कि विपक्ष सदन के सुचारू संचालन के लिए सरकार के साथ सहयोग करने को तैयार है। हम आज भी अनुरोध करते हैं कि हमारे चार सदस्यों को माफ कर दिया जाना चाहिए और सदन में वापस लाया जाना चाहिए। हम एक बहस चाहते हैं, हम सरकार के साथ सहयोग करना चाहते हैं। हमारे सदस्यों को वापस आने दें और हम वेल में नहीं जाएंगे।
सुप्रिया सुले ने कहा, हम चलाना चाहते हैं सदन
सुले ने कहा कि मैं विपक्ष की ओर से कह रही हूं कि हम सदन चलाना चाहते हैं। टीएमसी के सुदीप बंद्योपाध्याय ने भी कहा कि अगर सदन की भावना है तो चार सदस्यों का निलंबन रद्द कर दिया जाए। उन्होंने कहा, प्रह्लाद जोशी जी ने घोषणा की है कि सरकार महंगाई पर चर्चा के लिए तैयार है, हम भी बहस में हिस्सा लेने के लिए तैयार हैं। इस मुद्दे को सुलझाएं और बहस शुरू करें। द्रमुक के ए राजा ने कहा, कल जो हुआ वह लोकतंत्र के लिए स्वस्थ नहीं है। मैं सदन में दोनों तरफ रहा हूं। वेल में आकर तख्तियों के साथ लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करना इस सदन के लिए नया नहीं है।