भिलार्ई। तृतीय दिन प्रवचन को आगे बढ़ाते हुए देवी जी ने बताया कि भगवान् को जानकर ही प्रत्येक जीव सुखी हो सकता है जैसे जानना-मानना-प्यार ये क्रम होता है संसार में भी, ऐसे ही भगवान् को आज जीव जान ले तो तुरंत मान लेगा और तुरंत प्यार हो जायेगा और तुरंत भगवान मिल जायेंगे और तुरंत जीव का कल्याण हो जायेगा और अनंतकाल के लिए सुखी हो जायेगा । बस, जानना है। लेकिन कैसे? क्योंकि शास्त्र वेद तो कहते हैं कि भगवान् को कोई नहीं जान सकता वो सर्वथा हमारी माइक इन्द्रिय-मन-बुद्धि से परे हैं ।
तो फिर भगवान् को कैसे जाने? इसके समाधान में देवी ने बताया कि भगवान को जानने का एकमात्र उपाय है भगवत् कृपा । बस, भगवान् की कृपा से ही जीव उनको जान सकता है, प्राप्त कर सकता और अपना कल्याण कर सकता है । लेकिन उपर्युक्त कथन का अर्थ यह नहीं की हम भगवान की कृपा के भरोसे बैठे रहें या जब समय आएगा तब जान लेंगे, इस भरोसे बैठे रहें , ये गलत है ।
ऐसा नहीं देवी ने बताया कि भगवान की कृपा तो हम सब पर है । उन्होंने हमें शक्ति दे दी है कर्म करने की , अब हमारा काम है उनकी दी हुई शक्ति का सही इस्तेमाल करना । जैसे इस्तेमाल जैसे कर्म करेंगे वैसे फल मिलेगा । इसलिए देवी ने कहा की भगवान की कृपा के भरोसे नहीं बैठना है, हमें उनकी कृपा को पाने के लिए कुछ करना है । भगवान की एक शर्त है उनकी कृपा को पाने की , तो वो क्या शर्त है इसको आगे प्रवचन में बताया जाएगा।