नई दिल्ली । भारतीय संविधान की 72 वीं वर्षगांठ के मौके पर संसद के केन्द्रीय कक्ष में आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नेतृत्व में संविधान दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहाकि 72 साल पहले इसी सेंट्रल हॉल में हमारे संविधान निर्माताओं ने इस दस्तावेज को भारत के सुनहरे भविष्य के लिए स्वीकार किया था। करीब सात दशक की छोटी सी समयावधि में ही भारत के लोगों ने लोकतांत्रिक विकास की अद्भुत गाथा लिख दी है। इसने पूरी दुनिया को चकित कर दिया है। उन्होंने कहाकि मैं यह मानता हूं कि भारत की यह विकास यात्रा, हमारे संविधान के बल पर ही आगे बढ़ती रही है।
राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि आजादी के समय, देश के समक्ष उपस्थित चुनौतियों को यदि ध्यान में रखा जाए तो भारतीय लोकतंत्र मानव इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा सकता है। इस उपलब्धि के लिए हम संविधान निर्माताओं की दूरदर्शिता और जन-गण-मन की बुद्धिमत्ता को नमन करते हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे संविधान में वे सभी उदात्त आदर्श समाहित हैं जिनके लिए दुनिया के लोग भारत की ओर सम्मान और आशा भरी दृष्टि से देखते रहे हैं। उन्होंने कहाकि ‘हम भारत के लोगÓ इन शब्दों से आरम्भ होने वाले हमारे संविधान से यह स्पष्ट हो जाता है कि भारत का संविधान लोगों की आकांक्षाओं की सामूहिक अभिव्यक्ति है।
हमसे अन्य लोकतंत्रों ने बहुत कुछ सीखा
राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे देश में न केवल महिलाओं को आरम्भ से ही मताधिकार प्रदान किया गया बल्कि कई महिलाएं संविधान सभा की सदस्य थीं और उन्होंने संविधान के निर्माण में अभूतपूर्व योगदान दिया। पश्चिम के कुछ विद्वान कहते थे कि भारत में वयस्क मताधिकार की व्यवस्था विफल हो जाएगी। परन्तु यह प्रयोग न केवल सफल रहा, अपितु समय के साथ और मजबूत हुआ है। यहां तक कि अन्य लोकतंत्रों ने भी इससे बहुत कुछ सीखा है। राष्ट्रपति ने कहाकि मुझे प्रसन्नता है कि आज संविधान सभा की चर्चाओं तथा संविधान के कैलग्रिाफ्ड वर्जन और अद्यतन संविधान के डिजिटल संस्करण जारी कर दिए गए हैं। इस प्रकार, टेक्नॉलॉजी की सहायता से, ये सभी अमूल्य दस्तावेज़ सबके लिए सुलभ हो गए हैं।
संविधान की प्रस्तावना का हुआ पाठ
संबोधन से पहले राष्ट्रपति कोविंद ने संविधान बनाने वाली संविधान सभा की चर्चाओं के डिजिटल संस्करण को भी जारी किया। उन्होंने संविधान की मूल प्रति का डिजिटल संस्करण अद्यतन संविधान भी जारी किया। इसके अलावा उन्होंने संविधान पर ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी पोर्टल का शुभारंभ भी किया। संबोधन समाप्त होने के बाद उन्होंने संविधान की प्रस्तावना का पाठ किया और केन्द्रीय कक्ष में मौजूद सभी लोगों ने इसमें हिस्सा लिया। इसके अलावा एक विशेष पोर्टल के जरिये देश भर में अपनी अपनी जगह से करोड़ों लोगों ने संविधान सभा की प्रस्तावना का पाठ किया। इसके लिए सभी सरकारी प्रतष्ठिानों में विशेष इंतजाम किये गये थे।
प्रधानमंत्री ने विपक्ष के बहिष्कार पर किया कटाक्ष
संविधान दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सेंट्रल हॉल में अपना संबोधन दिया। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत राष्ट्रपित महात्मा गांधी और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि देते हुए की। इस मौके पर उन्होंने विपक्षी पार्टी के शामिल नहीं होने पर प्रधानमंत्री ने कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि यह विरोध आज से नहीं हो रहा है। उन्होंने पारिवारिक पार्टियां कहकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों पर हमला बोला। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कई दल अपना लोकतात्रिक चरित्र खो चुके हैं। पीएम मोदी ने कहा कि भारत एक ऐसे संकट की ओर बढ़ रहा है, जो संविधान को समर्पित लोगों के लिए चिंता का विषय है, लोकतंत्र के प्रति आस्था रखने वालों के लिए चिंता का विषय है और वो है पारिवारिक पार्टियां। उन्होंने कहा कि योग्यता के आधार पर एक परिवार से एक से अधिक लोग जाएं, इससे पार्टी परिवारवादी नहीं बन जाती है। लेकिन एक पार्टी पीढ़ी दर पीढ़ी राजनीति में है।
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