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मंत्री सोनोवाल ने कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में एक साथ पांच जहाजों का किया शुभारंभ

by Bhupendra Sahu

नई दिल्ली । पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग और आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने आज कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) में एक साथ पांच जहाजों की शुरुआत करने का उद्घाटन किया। केंद्रीय मंत्री तीन दिवसीय दौरे पर कोच्चि में थे, मंत्रालय का कार्यभार संभालने के बाद इस पीएसयू में उनका पहला दौरा था। जहाजों को सीएसएल की पांच वरिष्ठतम महिला कर्मचारियों द्वारा लॉन्च किया गया था। केंद्रीय मंत्री ने सीमा सुरक्षा बल के लिए तीन फ्लोटिंग बॉर्डर आउट-पोस्ट (एफबीओपी) और एएसकेओ मैरीटाइम एएस नॉर्वे के लिए दो पूरी तरह से इलेक्ट्रिक ऑटोनॉमस जहाजों के लॉन्चिंग समारोह का उद्घाटन किया, जो दुनिया की पहली ऑटोनॉमस नौकाओं में से है। सर्बानंद सोनोवाल ने शिपिंग उद्योग हेतु तकनीकी और टिकाऊ समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में योगदान करने वाले प्रयासों के लिए सीएसएल की सराहना की। उन्होंने देश के पहले स्वदेशी विमानवाहक युद्धपोत (आईएसी) आईएनएस विक्रांत के निर्माण के लिए भी सीएसएल की सराहना की, आईएनएस विक्रांत बेहद सफल पहले समुद्री परीक्षण के बाद वर्तमान में अपना दूसरा ट्रायल शुरू कर रहा है।

सोनोवाल कल समुद्री परीक्षण के दौरान नौसेना प्रमुख, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय में सचिव, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय में अपर सचिव और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक के साथ इस महत्वपूर्ण तथा रणनीतिक राष्ट्रीय परियोजना पर हुई प्रगति को देखने और इसकी समीक्षा करने के लिए स्वदेशी विमानवाहक युद्धपोत पर सवार हुए। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आईएसी के समुद्री परीक्षणों की सफलता हमारे राष्ट्र की आत्मनिर्भरता को प्राप्त करने का सच्चा प्रतिबिंब है। केंद्रीय मंत्री ने इस उपलब्धि के लिए सीएसएल, भारतीय नौसेना, विभिन्न मूल उपकरण निर्माताओं और परियोजना में शामिल सभी हितधारकों को बधाई दी।

आईएसी देश में निर्मित सबसे बड़ा युद्धपोत है, जिसका विस्थापित भार लगभग 40,000 टन है। यह जहाज स्वदेशी रूप से विकसित 21,500 टन विशेष ग्रेड स्टील की एक विशाल इस्पात संरचना है और पहली बार भारतीय नौसेना के जहाजों में इसका उपयोग किया गया है। जहाज की विशालता का अनुमान इसकी लगभग 2000 किलोमीटर की केबलिंग, 120 किलोमीटर पाइपिंग और जहाज पर उपलब्ध 2300 कंपार्टमेंट्स से लगाया जा सकता है। शिपयार्ड ने उन्नत सॉफ्टवेयर का उपयोग करके जहाज की विस्तृत इंजीनियरिंग की है, जिससे डिजाइनर को जहाज के कंपार्टमेंट्स का पूरा 3डी दृश्य प्राप्त करने में मदद मिली। यह देश में पहली बार है कि किसी एयरक्राफ्ट कैरियर के आकार के जहाज को पूरी तरह से 3डी में तैयार किया गया है और फिर 3डी मॉडल से प्रोडक्शन ड्रॉइंग निकाले गए हैं। पोत एक सीओजीएजी (संयुक्त गैस और गैस) प्रपल्शन कॉन्फिगरेशन में चार गैस टर्बाइनों द्वारा संचालित है। आईएसी नेटवर्क केंद्रित वितरित डेटा प्रोसेसिंग और नियंत्रण प्रणाली, जटिल विमानन सुविधा परिसर, अत्याधुनिक हथियारों और सेंसर सहित कई हाई एंड प्रौद्योगिकियों से लैस है और इसमें भारत में ही निर्मित किसी भी जहाज पर स्थापित होने वाले सबसे शक्तिशाली प्रपल्शन और बिजली उत्पादन एवं वितरण (पीजीडी) प्रणालियां मौजूद हैं।

स्वदेशी विमानवाहक युद्धपोत के निर्माण ने भारतीय अर्थव्यवस्था में अत्यधिक योगदान दिया है क्योंकि इसने अपस्ट्रीम उद्योगों जैसे स्टील, इलेक्ट्रो मैकेनिकल मशीनरी उपकरण और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों जैसे बुनियादी ढांचे तथा सेवाओं दोनों में मांग पैदा की है। इससे बड़ी संख्या में सहायक उद्योगों के विकास के अलावा स्वदेशी डिजाइन और निर्माण क्षमताओं में वृद्धि हुई है, 2000 सीएसएल कर्मियों तथा सहायक उद्योगों में लगभग 12000 कर्मचारियों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं।
कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड की युद्धपोतों की मरम्मत के सिलसिले में भारतीय नौसेना के साथ एक लंबी साझेदारी रही है और भारतीय नौसेना के सभी विमान वाहकों ने केवल कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में ही अपनी ज़्यादातर मरम्मत और डॉकिंग की है। आईएसी के निर्माण में प्रगति के साथ, यार्ड और भारतीय नौसेना के बीच तालमेल कई गुना बढ़ गया है। केंद्र सरकार भौगोलिक विस्तार और क्षमता वृद्धि पर अपने प्रयासों में यार्ड को हर संभव सहायता प्रदान कर रही है। मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 के माध्यम से सरकार का लक्ष्य भारत को पोत निर्माण और जहाज मरम्मत के लिए एक पसंदीदा गंतव्य स्थल बनाना है। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि सीएसएल इस प्रयास में एक प्रमुख भागीदार है।

केंद्रीय मंत्री ने सीएसएल परिसर में शिप मॉडल रूम स्मृति का उद्घाटन किया, जो सीएसएल के समृद्ध इतिहास के 50 वर्षों का चित्रण करता है। स्मृति पिछले पांच दशकों में सीएसएल द्वारा निर्मित प्रमुख जहाजों को प्रदर्शित करती है। सोनोवाल द्वारा सीएसएल की अत्यधिक मान्यता प्राप्त सीएसआर पहलों पर आधारित एक कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया गया। अपने दौरे के दौरान, केंद्रीय मंत्री ने यार्ड के कार्यों की समीक्षा की और सीएसएल के जहाज निर्माण तथा जहाज मरम्मत स्थलों का दौरा किया। केंद्रीय मंत्री ने सीएसएल द्वारा विलिंगडन द्वीप कोच्चि में स्थापित की जा रही अंतर्राष्ट्रीय जहाज मरम्मत सुविधा को भी देखा।

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