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सदन में कम हाजिरी वाले सांसदों को संसदीय समिति में नहीं मिलेगी जगह

by Bhupendra Sahu

नई दिल्ली । संसद की स्थायी समितियों के इस माह होने वाले पुनर्गठन के लिए उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने सभी दलों को पत्र लिखकर सांसदों की रुचि और उपस्थिति को ध्यान में रखकर सांसदों को नामांकित करने का आग्रह किया है। इस बारे में बीते एक साल की विभिन्न संसदीय समितियों की उपस्थिति और सांसदों की रुचि के आंकड़े भी जारी किए गए हैं। नए नियमों से सदन और समितियों की बैठकों में कम आने वाले सांसदों की समितियों में एंट्री बंद हो सकती है।

विभिन्न संसदीय समितियों में सदस्य राज्यसभा के 243 सांसदों में 16 सांसद ही ऐसे रहे जिनकी उपस्थिति शत प्रतिशत रही। इनमें भाजपा के 10, कांग्रेस के तीन और सपा, द्रमुक एवं टीआरएस के एक-एक सांसद शामिल हैं। संसद की विभिन्न विभाग संबंधी स्थायी समितियों का पुनर्गठन हर साल सितंबर माह में होता है और इनमें सदन के अंदर अपनी संख्या के अनुसार हर दल को एक निश्चित संख्या में अपने सांसदों को नामांकित करने का मौका मिलता है। राज्यसभा के बीते एक साल सितंबर 2020 से अगस्त 2021 तक के विभिन्न संसदीय समितियों के आंकड़ों के अनुसार संसद की 24 विभाग संबंधी स्थायी संसदीय समितियों में राज्यसभा के कुल 243 सांसद सदस्य हैं। इनमें 32 दलों के साथ निर्दलीय एवं मनोनीत वर्ग के इन सांसदों ने 361 बैठकों में हिस्सा लिया। वेंकैया नायडू तीन साल से इन संसदीय समितियों पर बारीकी नजर रखे हुए हैं। उन्होंने सभी समितियों के सभापतियों से कहा था कि समिति की हर बैठक में कम से कम 50 फीसद की उपस्थिति और ढाई घंटे तक की बैठक सुनिश्चित करें।
केवल 16 सांसदों की उपस्थिति शतप्रतिशत
आंकड़ों के अनुसार विभिन्न समितियों में शामिल राज्यसभा के कुल 16 सदस्य ही ऐसे रहे, जिनकी उपस्थिति शत-प्रतिशत रही। इनमें भाजपा के 10 सांसद सुब्रमण्यम स्वामी, राकेश सिन्हा, के सी राममूर्ति, अरुण सिंह, विकास महात्मे, अशोक वाजपेयी, डीपी वत्स, जयप्रकाश निषाद, विनय सहस्त्रबुद्धे और टीजी वेंकटेश शामिल है। कांग्रेस के तीन सदस्य आनंद शर्मा, जयराम रमेश और छाया वर्मा, सपा के रामगोपाल यादव, द्रमुक के विल्सन और टीआरएस के केशव राव भी सभी समितियों की बैठक में उपस्थित रहे।
इन 92 सांसदों की हाजिरी 50 फीसदी से ज्यादा
आंकड़ों के अनुसार भाजपा के 92 सांसदों की इन समितियों की बैठकों में उपस्थिति 50.50 फीसद रही, जबकि कांग्रेस के 38 सांसदो की उपस्थिति 41.86 फीसद रही। अन्य दलों में सबसे ज्यादा उपस्थिति वाईएसआरसीपी की 66.66 फीसदी रही, जबकि सबसे कम जनता दल यू की 16.17 फीसद रही। बीजद की 61. 65 फीसदी, टीआरएस की 43.56 फीसदी, डीएमके की 43.34 फीसदी, सपा की 37.98 फीसदी, राजद की 36.36 फीसदी, माकपा की 33.96 फीसदी, अन्नाद्रमुक की 31.09 फीसदी, बीएसपी की 26.66 फीसदी, तृणमल कांग्रेस की 24.44 फीसदी, आम आदमी पार्टी की 77.19 फीसदी, शिवसेना की 75.55 फीसदी, अकाली दल की 69.23 फीसदी, राकांपा की 39.21 फीसदी, पीडीपी की 16.66 फीसदी व तेलुगुदेशम 90 फीसदी उपस्थिति रही। निर्दलीय और मनोनीत सांसदों की उपस्थिति नौ फीसद रही।
कृषि समिति में 93.33 फीसदी हाजिरी
समितियों की विभिन्न बैठकों में 16 सदस्य अपनी सभी बैठकों में उपस्थित रहे, जबकि 115 सांसद 50 फीसदी से ज्यादा बैठकों में उपस्थित रहे। इन 131 सांसदों की उपस्थिति 54 फीसद या ज्यादा रही, जबकि एक तिहाई सांसद 30 फीसद से भी कम उपस्थित रहे। विभिन्न समितियों की बैठकों में रुचि को देखा जाए तो भाजपा की तरफ से रक्षा संबंधी समिति में 87.50 फीसदी, केमिकल फर्टिलाइजर में 83.33 फीसदी, पर्सनल, पेंशन और जन शिकायत समिति की बैठक में 79.16 फीसदी, गृह में 77.63 फीसदी, कोयला और स्टील में 75 फीसदी, उद्योग में 72.72 फीसदी और शिक्षा में 66.66 फीसदी उपस्थिति रही।
कांग्रेस के सांसद साइंस एवं टेक्नोलॉजी समिति में सौ फीसद उपस्थित रहे। इस समिति के चेयरमैन जयराम रमेश है। रमेश इस समिति में कांग्रेस से अकेले सदस्य हैं। इसके अलावा कृषि में 93.33 फीसदी, केमिकल और फर्टिलाइजर में 88 फीसदी, जल संसाधन में 83.33 फीसदी, शिक्षा में 83.33 फीसदी, गृह में 78 94 फीसदी, ग्रामीण विकास में 83 फीसदी उपस्थिति रही, लेकिन वित्त में 3.12 फीसदी, विदेश में 8.92 फीसदी, वाणिज्य में 13 फीसदी उपस्थिति ही रही।
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