नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली का दौर देखने को मिला और यह लगातार चौथे दिन लाल निशान पर बंद हुआ। बाजार में मची इस अफरातफरी के चलते सेंसेक्स और निफ्टी धड़ाम हो गए हैं। गुरुवार के कारोबारी सत्र के अंत में बीएसई सेंसेक्स 780 अंक या 0.92 प्रतिशत लुढ़ककर 84,181 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 264 अंक या 1.01 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,877 पर सिमट गया। पिछले महज चार दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सेंसेक्स में करीब 1600 अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई है। 2 जनवरी को जो सेंसेक्स 85,762 पर था, वह अब लुढ़ककर 84,180 के करीब आ गया है। इसी तरह निफ्टी भी इन चार कारोबारी दिनों के दौरान 400 अंक नीचे खिसक चुका है।
बाजार में आई इस जबरदस्त गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका से आ रही खबरों को माना जा रहा है, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। दरअसल, अमेरिका में रूस पर आर्थिक दबाव बनाने के उद्देश्य से एक नया बिल ‘स्ड्डठ्ठष्ह्लद्बशठ्ठद्बठ्ठद्द क्रह्वह्यह्यद्बड्ड ्रष्ह्ल शद्घ 2025Ó पेश किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस रणनीतिक चाल के तहत रूस से तेल खरीदने वाले भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। 500 फीसदी टैरिफ की इसी आहट से भारतीय शेयर बाजार सहम गया है और भविष्य की अनिश्चितता को देखते हुए निवेशकों ने बाजार से हाथ खींचना शुरू कर दिया है।
चौतरफा बिकवाली के इस तूफान में निवेशकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। गुरुवार को बाजार बंद होने तक बीएसई के कुल मार्केट कैप में लगभग 8.11 लाख करोड़ रुपये की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की संपत्ति, जो पिछले सत्र में 479.94 लाख करोड़ रुपये थी, वह घटकर अब 471.82 लाख करोड़ रुपये रह गई है। बाजार को नीचे गिराने में रिलायंस इंडस्ट्रीज, एलएंडटी, टीसीएस, इंफोसिस, एसबीआई और एचडीएफसी बैंक जैसी दिग्गज कंपनियों का बड़ा हाथ रहा। सेंसेक्स के टॉप 30 शेयरों में से केवल 4 शेयर ही हरे निशान में अपनी जगह बना पाए। एलएंडटी के शेयरों में सबसे ज्यादा 3.35 फीसदी, टेक महिंद्रा में 2.94 फीसदी और टीसीएस में 2.74 फीसदी की गिरावट आई, जबकि जोमैटो और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में मामूली बढ़त देखने को मिली।
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