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शिक्षा गुणवत्ता, समयबद्धता और परिणामोन्मुखी कार्य ही मुख्य लक्ष्य – शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव

by Bhupendra Sahu

महासमुंद । रायपुर संभाग के स्कूल शिक्षा विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक आज महासमुंद में प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। जिला पंचायत में आयोजित बैठक में उन्होंने सभी जिलों के अधिकारियों और शिक्षकों को शिक्षण गुणवत्ता बढ़ाने, समयबद्धता और परिणाम मूलक कार्य सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। बैठक में सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी, आयुक्त समग्र शिक्षा डॉ. प्रियंका शुक्ला, तथा शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारी एवं रायपुर, बलौदा बाजार, धमतरी, गरियाबंद और महासमुंद जिलों के डीईओ, डीएमसी, बीईओ एवं बीआरसी अधिकारी उपस्थित थे।

बैठक में स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि शिक्षा विभाग का मूल कार्य अध्ययन एवं अध्यापन है। इसे अधिकारी अपने मूल कार्य को न भूले और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए समर्पित होकर कार्य करें। मंत्री श्री यादव ने सभी जिलों को निर्देशित किया कि अगले तीन वर्षों के लिए एक समग्र कार्ययोजना तैयार की जाए, जिसमें विद्यालयों की अधोसंरचना की मजबूत व्यवस्था, शैक्षणिक वातावरण का संवर्धन, शैक्षणिक गुणवत्ता में ठोस सुधार जैसे पहलुओं को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक योजना ही स्थायी और प्रभावी शिक्षा सुधार का आधार बनेगी। हमारा मुख्य उद्देश्य बच्चों के बेहतर शिक्षा को लेकर है इसमें किसी प्रकार की लापरवाही या कोताही नहीं चलेगी।

बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि सभी शिक्षक एवं कर्मचारियों के लिए ऑनलाइन बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य होगी। समय पर उपस्थिति नहीं देने वालों पर विभाग निगरानी रख रहा है। उन्होंने कहा कि अनुशासन और समयबद्धता शिक्षा की गुणवत्ता सुधार का पहला चरण है। बैठक में बीईओ और बीआरसी को विद्यालयों का नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि डीईओ और बीईओ को दौरा चार्ट बनाकर उसका कड़ाई से पालन करना होगा, जिसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को भी दिया जाए। वे नियमित रूप से अध्यापन कार्य भी करते रहें।
विद्यार्थियों के लिए अपार आईडी 100 प्रतिशत पूर्ण करने के निर्देश दिए। जिला शिक्षा अधिकारियों को मिशन मोड में इसे पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। पिछले वर्ष के बोर्ड परीक्षा परिणामों की गहन समीक्षा करते हुए मंत्री ने निर्देश दिए कि कक्षा 10वीं का परिणाम न्यूनतम 85 प्रतिशत और 12वीं का परिणाम 90 प्रतिशत लाने का लक्ष्य रखा जाए। उन्होंने कहा कि लक्ष्य सिर्फ उत्तीर्णता नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को उच्च श्रेणी में उत्तीर्ण कराना है। बैठक में मासिक परीक्षा को अनिवार्य बताते हुए इसकी सतत निगरानी पर बल दिया गया। सभी जिलों को अपने-अपने स्तर पर परिणाम सुधार की रणनीति तैयार कर लागू करने को कहा गया। स्कूलों में पीएम ई-विद्या चैनल को एक सप्ताह के भीतर नियमित रूप से अवलोकन करने के निर्देश भी दिए गए। शिक्षण पद्धति में ब्लूप्रिंट आधारित अध्ययन, उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग और कुशल शिक्षकों द्वारा गुणवत्ता शिक्षण पर विशेष जोर दिया गया।
मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने कक्षा 3 से 5 तक के विद्यार्थियों को धारा-प्रवाह हिंदी पढ़ने में सक्षम बनाने के लिए विशेष योजना तैयार करने और माध्यमिक व उच्चतर माध्यमिक स्तर पर बेसिक गणित एवं अंग्रेजी दक्षता बढ़ाने पर भी बल दिया गया। शिक्षकों को पालकों एवं समुदाय के साथ नियमित संवाद बढ़ाने और विद्यार्थियों को प्रेरित करने के निर्देश दिए गए। ड्रॉपआउट रोकने को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए मंत्री ने अधिकारियों की जवाबदेही निश्चित करने को कहा। इसी के साथ परीक्षा समिति को सक्रिय कर पूरी निष्ठा से कार्य करने पर जोर दिया गया।
उन्होंने सेवानिवृत्त शिक्षकों की सेवा पुस्तिका एवं पासबुक का त्वरित संधारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि शिक्षक जिस दिन सेवानिवृत्त हो रहे हो उसी दिन उनके सत्वों का भुगतान सुनिश्चित की जाए। विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी इसे गम्भीरता से लेवें। बैठक में भवनहीन विद्यालयों के अधोसंरचना कार्यों को विभागीय समन्वय से शीघ्र पूर्ण करने पर बल दिया गया। इस वर्ष मॉडल स्कूलों के चयन की प्रक्रिया तेज करने को कहा गया। साथ ही बीईओ के लिए लक्ष्य आधारित गोपनीय प्रतिवेदन व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए। बैठक में पीएम श्री विद्यालयों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने कहा कि प्रगतिरत और अपूर्ण कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए, ताकि इन स्कूलों को उत्कृष्ट शिक्षण के आदर्श मॉडल के रूप में विकसित किया जा सके।

मंत्री द्वारा वैज्ञानिक मॉडल, प्रदर्शनी को सराहा गया, स्कूली बच्चों द्वारा बनाया गया मॉडल
शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने आज यहां जिला पंचायत परिसर में शिक्षा विभाग द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टॉल, मॉडल और शैक्षणिक गतिविधियों का अवलोकन किया। विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए मॉडलों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों में सृजनात्मकता का विकास होता है। यह एक बेहतर प्रयास है। उन्होंने महासमुंद विकासखण्ड अंतर्गत अटल टिकरिंग लैब द्वारा स्मार्ट डेम सिंचाई मॉडल का अवलोकन किया और उनके प्रयास को सराहा। बागबाहरा विकासखण्ड में एआई टूल्स पर आधारित प्रदर्शनी दिखाई गई। इसी तरह पिथौरा में शिक्षक द्वारा काष्ठ कला एवं साबुन से बने कलाकृति का प्रदर्शन किया गया। बसना में चनाट पीए श्री स्कूल के बच्चों द्वारा जादुई पिटारा और जादुई गणित का प्रदर्शन किया गया। वहीं सरायपाली द्वारा खेल-खेल में शिक्षा से संबंधित जादुई पिटारा का अवलोकन कराया गया।

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