अंबिकापुर । महारानी दुर्गावती जनजातीय गौरव का प्रतीक हैं। उनका देश प्रेम और संघर्ष हम सबको प्रेरणा से भर देता है। यह बात मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महारानी दुर्गावती बलिदान दिवस के अवसर पर राजमोहिनी देवी सभा भवन, अंबिकापुर में जनजाति गौरव समाज द्वारा आयोजित कार्यक्रम के अवसर पर कही।
मुख्यमंत्री साय ने इस मौके पर महारानी दुर्गावती के बलिदान का स्मरण करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार जनजातीय गौरव की भावना को सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। महारानी दुर्गावती का भव्य स्मारक जबलपुर में तैयार कराया गया है। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जनजातीय समाज से हैं। उनका इस सर्वोच्च पद में आसीन होना जनजातीय समाज के लिए गौरव का विषय है। मुख्यमंत्री ने माँ महामाया को नमन करते हुए कहा कि रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस के मौके पर जनजातीय गौरव समाज ने बहुत ही अच्छा कार्यक्रम किया है। मैं सौभाग्यशाली हूँ कि इस अवसर आपके बीच हूँ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे देश की परंपरा नारियों के सम्मान की है। शास्त्रों में कहा गया है कि यत्र नार्यस्तु पूज्यंते, रमन्ते तत्र देवताः। जब भी हम अपने देवता का नाम पुकारते हैं उससे पहले माता का नाम पुकारते हैं। हम सीता राम कहते हैं। राधे श्याम कहते हैं, हमेशा माता सबसे पहले स्मरण में आती हैं। मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज की बलिदानी परंपरा को भी इस अवसर पर स्मरण किया। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई में जनजातियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। चाहें बिरसा मुंडा हों, या गुंडाधुर हो, वीरनारायण सिंह हो इन सब बलिदानी महापुरुषों के बलिदान से देश स्वाधीन हुआ। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार इस जनजातीय गौरव के योगदान को रेखांकित कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी और वंचित समुदाय के जो बच्चे ऊंची शिक्षा हासिल करना चाहते हैं उनके लिए भी अवसरों की कमी नहीं है। राज्य में 14 प्रयास आवासीय विद्यालय संचालित है, जहां रहकर हमारे बच्चे नीट और जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी समुदाय के युवाओं को सपनों को आकार देने सरकार लगातार काम कर रही है। जो बच्चे कलेक्टर, एसपी बनना चाहते हैं और दिल्ली में रहकर संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी करना चाहते हैं, उनके लिए नई दिल्ली में ट्रायबल यूथ हॉस्टल संचालित किया जा रहा है। पहले इस हॉस्टल में सीटों की संख्या 50 थी। हम लोग युवाओं से मिले और महसूस किया कि इसे बढ़ाने की जरूरत है। फिर हमने यहां की सीटें बढ़ाकर 185 कर दी हैं। इन बच्चों की कोचिंग के खर्च का जिम्मा सरकार उठायेगी। इसके अलावा उन्हें और भी बहुत सी सुविधाएं दी जाती हैं।