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सरकार की फिर भरी झोली, केंद्रीय उपक्रमों से भी मिलेगा रिकॉर्ड डिविडेंड

by Bhupendra Sahu

नईदिल्ली। तेल विपणन कंपनियों, सरकारी बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम से लाभांश बहुत बढऩे के कारण सरकार को वित्त वर्ष 2023-24 के लिए केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों से करीब 1.26 लाख करोड़ रुपये इक्विटी डिविडेंड मिलेगा।
यह लाभांश का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है और वित्त वर्ष 2023 के 97,750 करोड़ रुपये के लाभांश से 28.7 फीसदी अधिक है। इसमें सूचीबद्ध पीएसयू द्वारा पिछले वित्त वर्ष की शुरुआती तीन तिमाहियों में दिया गया अंतरिम डिविडेंड भी शामिल है।
केंद्रीय पीएसयू से मिलने वाले इस लाभांश का करीब 60 फीसदी सरकार को प्रवर्तक होने के कारण दिया जाएगा। इस प्रकार केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2024 में केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों से कुल 76,166 करोड़ रुपये की लाभांश आय की उम्मीद है।
वित्त वर्ष 2022-23 में मिली 59,406 करोड़ रुपये की लाभांश आय के मुकाबले यह 28.2 फीसदी अधिक है। पिछले पांच साल में सीपीएसयू से लाभांश भुगतान 19.2 फीसदी की सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ा है और इसमें सरकार की का हिस्सा 18.9 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ा है।
विभिन्न केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों में भारत सरकार की हिस्सेदारी 51.1 फीसदी से 98.25 फीसदी के बीच है। एनटीपीसी में उसकी हिस्सेदारी सबसे कम 51.1 फीसदी और पंजाब ऐंड सिंध बैंक में सबसे ज्यादा 98.25 फीसदी है।
सीपीएसयू से इतना अधिक लाभांश केंद्र सरकार के बजट के लिए दोहरी लॉटरी की तरह है। पिछले हफ्ते ही भारतीय रिजर्व बैंक ने भी उसे करीब 2.11 लाख करोड़ रुपये बतौर लाभांश देने का ऐलान किया था, जो ऐतिहासिक रकम होगी।
इसी साल फरवरी में आए केंद्रीय बजट के संशोधित अनुमानों के अनुसार सरकार को रिजर्व बैंक और सीपीएसयू से कुल 1,54,407 करोड़ रुपये लाभांश मिलने की उम्मीद थी। वित्त वर्ष 2022-23 में केंद्र को सार्वजनिक क्षेत्र से लाभांश एवं मुनाफे में 99,913 करोड़ रुपये मिले थे।
तेल मार्केटिंग कंपनी इंडियन ऑयल से सरकार को वित्त वर्ष 2024 में सबसे अधिक लाभांश मिल रहा है। कंपनी वित्त वर्ष 2024 में अपने शेयरधारकों को लाभांश के तौर पर 16,945.5 करोड़ रुपये दे रही है, जो उससे पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 300 फीसदी अधिक है। उसके बाद कोल इंडिया (15,715 करोड़ रुपये), ओएनजीसी (15,411 करोड़ रुपये) और पावरग्रिड कॉरपोरेशन (10,463 करोड़ रुपये) लाभांश दे रही हैं।
इंडियन ऑयल के मुकाबले कोल इंडिया और ओएनजीसी में सरकार की हिस्सेदारी अधिक है। कोल इंडिया में सरकार की हिस्सेदारी 63.13 फीसदी और ओएनजीसी में 58.89 फीसदी है। इंडियन ऑयल में उसकी हिस्सेदारी 51.15 फीसदी ही है।
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