राजनांदगांव । कलेक्टर संजय अग्रवाल ने आज कलेक्टारेट सभाकक्ष में साप्ताहिक समय-सीमा की बैठक ली। कलेक्टर अग्रवाल ने कहा कि जल संरक्षण के लिए जिले में बेहतरीन कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिले में जल का संरक्षण करना जरूरी एवं प्रासंगिक है। आने वाले समय में जल की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जल जागरूकता आवश्यक है। जिले में राजनांदगांव, डोंगरगांव तथा डोंगरगढ़ क्षेत्र में भू-जल के स्तर में कमी आयी है। 70 से 90 प्रतिशत पानी का दोहन कर लिया गया है। जिले में 42 हजार मोटर पंप तथा ट्यूबवेल चल रहे हैं। विशेषकर धान की फसल में अधिक पानी की आवश्यकता होती है।
इसी गति से भू-जल स्तर में कमी आने पर भविष्य में दिक्कत हो सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा मोटर पंप तथा ट्यूबवेल चलाने से लो-वोल्टेज की समस्या भी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि जिले में ऐसी फसलों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है, जिनमें कम पानी की जरूरत होती है। इस बात पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है कि सिंचाई के लिए सरफेस वाटर का उपयोग करना है। ग्रॉस ग्राऊंड वाटर का उपयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने ऐसे गांवों को सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए जहां जल के स्तर में ज्यादा कमी आयी है। उन्होंने कहा कि गर्मी के दिनों में मोटर पंप तथा ट्यूबवेल से सिंचाई नहीं होना चाहिए। उन्होंंने कहा कि जल के संरक्षण के महत्व को ध्यान में रखते हुए पहाड़ों में वाटर रिचार्ज करने के लिए परकोलेशन टैंक बनाए गए हैं, जिसके भविष्य में अच्छे परिणाम मिलेंगे। उन्होंने सभी विभागों को इस कार्य में अपना योगदान देने के लिए प्रेरित किया। जल संरक्षण के लिए बनाए गई संरचना से मिट्टी का कटाव भी रूकेगा। पौधरोपण करने के साथ ही जल संरक्षण के उपायों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।