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विधानसभा में अब विधायक केवल एक बाहरी व्यक्ति को दिलवा सकेंगे दीर्घा में प्रवेश

by Bhupendra Sahu

भोपाल । देश की राजधानी दिल्ली में संसद पर आतंकी हमले की बरसी के दिन ही दो युवक सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए लोकसभा की दर्शक दीर्घा से सदन में कूदकर स्मोक बम सरीखी सामग्री से धुआं छोडऩे की घटना को देखते हुए विधानसभा सचिवालय भी हरकत में आ गया है। गुरुवार को प्रमुख सचिव एपी सिंह ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की और निर्देश दिए कि अब विधायक केवल एक ही बाहरी व्यक्ति को दर्शक दीर्घा में प्रवेश दिला पाएंगे। दो स्तर पर जांच होगी और कोई भी ऐसी सामग्री ले जाने की अनुमति नहीं होगी, जिसे सुरक्षा को कोई खतरा हो।
मध्य प्रदेश में 16वीं विधानसभा का गठन हो चुका है। दिसंबर में पहला सत्र प्रस्तावित है। लोकसभा की सुरक्षा में सेंध की घटना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर समीक्षा की गई। अभी विधानसभा अध्यक्ष या सदस्य अपने क्षेत्र के लोगों को विधानसभा की कार्यवाही देखने के लिए प्रवेश पत्र जारी करवाते हैं। इसमें बैठक व्यवस्था के अनुसार सदस्यों की अनुशंसा पर प्रवेश पत्र जारी किए जाते हैं, लेकिन अब विधायक के स्वजन के अलावा वे केवल एक बाहरी व्यक्ति की ही अनुशंसा कर सकेंगे। विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह ने बताया कि सत्र के पहले एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। विधानसभा परिसर और दीर्घा में प्रवेश से पहले जांच होगी।

मप्र विधानसभा में आगंतुकों के लिए विधानसभा सचिवालय द्वारा प्रवेश पत्र जारी किए जाते हैं। यह विधानसभा अध्यक्ष या विधायक की अनुशंसा पर ही जारी किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त उनके पास आधार कार्ड या अन्य फोटोयुक्त पहचान पत्र होना अनिवार्य रहता है। प्रवेश पत्र में ही इस बात का उल्लेख होता है कि संबंधित व्यक्ति किस दीर्घा में जाकर बैठ सकता है।
विधानसभा में पहुंचने वाले व्यक्ति को दो जगहों पर सुरक्षा जांच से गुजरना होता है। पहले परिसर के बाहरी द्वार पर तैनात सुरक्षाकर्मी उनकी जांच करते हैं। इसके बाद दीर्घा में प्रवेश से पहले फिर उनकी जांच होती हैं। यहां उनके जूते-चप्पल, बेल्ट उतरवा रखवा लिए जाते हैं। खाने-पीने की कोई चीज अपने साथ नहीं ले जा सकते हैं। मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति तो रहती है, पर उसे बंद करके रखना होता है।
विधानसभा के अपर सुरक्षा सचिव उमेश शर्मा ने बताया कि सत्र के दौरान विधानसभा परिसर की पूरी सुरक्षा व्यवस्था राज्य पुलिस बल के हवाले रहती है। सामान्य दिनों में राज्य के विशेष सशस्त्र बल के 27 जवान तैनात रहते हैं। वहीं, विधानसभा का सुरक्षा अमला, जिसमें लगभग सौ जवान हैं, भी परिसर के भीतर तैनात रहता है।
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