नई दिल्ली । जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल को 538 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी और मनी-लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद सोमवार को विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया। जहां अदालत ने अब 14 सितम्बर तक नरेश गोयल को ईडी की कस्टडी में भेज दिया है।
केनरा बैंक से 538 करोड़ रुपये की कथित बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने शुक्रवार (1 सितंबर) की देर रात गोयल को गिरफ्तार किया गया था। जिसके बाद 74 वर्षीय गोयल को शनिवार को मुंबई में विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया था। जहां ईडी ने उनकी हिरासत की मांग की थी और अदालन ने उन्हें 11 सितंबर तक के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया था।
इससे पहले, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिमांड की मांग करते हुए अदालत को बताया था कि गोयल ने उधार लिए गए पैसे का इस्तेमाल व्यक्तिगत लाभ और ऐशो-आराम में किया। इसके अलावा लोन राशि का दुरुपयोग नाजायज उद्देश्यों के अलावा फर्नीचर, परिधान और आभूषण जैसी चीजें खरीदने के लिए किया गया। जेआईएल के फंड का इस्तेमाल गोयल ने अपने आवासीय कर्मचारियों के वेतन का भुगतान करने और उनकी बेटी के स्वामित्व वाली एक उत्पादन कंपनी के परिचालन खर्चों को पूरा करने के लिए भी किया गया। इसके अलावा विभिन्न व्यक्तियों, संस्थाओं को पेशेवर और परामर्श शुल्क के भुगतान की आड़ में भी धन की हेराफेरी का दावा किया गया है।
जेट एयरवेज, नरेश गोयल, उनकी पत्नी अनीता गोयल और कंपनी के कुछ पूर्व अधिकारियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का यह मामला केनरा बैंक से 538 करोड़ रुपये के कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है। इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने केनरा बैंक की शिकायत पर गोयल दंपती और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। ईडी ने मामले की जांच सीबीआई की प्राथमिकी के आधार पर शुरू की थी। सीबीआई ने बैंक धोखाधड़ी मामले में गोयल, उनकी पत्नी अनिता और कंपनी के कुछ पूर्व अधिकारियों को आरोपी बनाया है।
बैंक ने सीबीआई को शिकायत की थी कि उसने जेट एयरवेज लिमिटेड (जेएएल) को 848.86 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था, जिसमें से 538.62 करोड़ रुपये अब भी बकाया हैं। इस खाते को 29 जुलाई, 2021 को फ्रॉड घोषित कर दिया गया था।
बैंक का आरोप था कि कंपनी की फोरेंसिक ऑडिट से पता चला कि गोयल ने अपनी अन्य कंपनियों को 1410.41 करोड़ रुपये कमीशन के रूप में भुगतान किया और जेट का पैसा बाहर भेजा। सहयोगी कंपनियों को कर्ज और अन्य निवेश के जरिये भी भुगतान किया गया।
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