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वैश्विक स्तर पर जीवन की समग्र डिजिटल गुणवत्ता के मामले में भारत चीन से पीछे

by Bhupendra Sahu

नई दिल्ली। जब जीवन की समग्र डिजिटल गुणवत्ता को बनाए रखने की बात आती है, तो 52वें स्थान पर मौजूद भारत अभी भी विश्व स्तर पर चीन (44वें स्थान) से पीछे है, सोमवार को एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।
साइबर-सुरक्षा कंपनी सुरफशार्क द्वारा जीवन की डिजिटल गुणवत्ता (डीक्यूएल) सूचकांक एक वार्षिक अध्ययन है, जो 5 मुख्य स्तंभों – इंटरनेट गुणवत्ता, इंटरनेट सामर्थ्य, ई-सुरक्षा, ई-बुनियादी ढांचे और ई- के आधार पर 121 देशों को उनकी डिजिटल भलाई के आधार पर रैंक करता है।
5वें डीक्यूएल अध्ययन में भारत को दुनिया में 52वां स्थान दिया गया है, जो पिछले साल 59वां था।
यह वृद्धि मुख्यत: देश की इंटरनेट गुणवत्ता में वृद्धि के कारण है, जिसके लिए यह अब 16वें स्थान पर है।
हालांकि, देश को ई-बुनियादी ढांचे में चुनौतियों का सामना करना पड़ा और 91वें स्थान पर रहा। शेष स्तंभों के लिए, भारत इंटरनेट सामर्थ्य में 28वें, ई-सरकार में 35वें और ई-सुरक्षा में 66वें स्थान पर है।
एशिया में, भारत 13वें स्थान पर है, सिंगापुर इस क्षेत्र में अग्रणी है।
भारत की इंटरनेट गुणवत्ता वैश्विक औसत से 36 प्रतिशत अधिक, दुनिया में 16वें स्थान पर है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की मोबाइल इंटरनेट स्पीड (74 एमबीपीएस) पिछले साल से 297 फीसदी बढ़ गई है, जबकि फिक्स्ड इंटरनेट स्पीड (76 एमबीपीएस) में 16 फीसदी का सुधार हुआ है।
फिक्स्ड ब्रॉडबैंड इंटरनेट का खर्च उठाने के लिए भारतीयों को महीने में 1 घंटा 48 मिनट काम करना पड़ता है, लेकिन यह रोमानिया की तुलना में 6 गुना अधिक है, जहां दुनिया का सबसे किफायती फिक्स्ड इंटरनेट है।
सफऱ्शार्क के प्रवक्ता गैब्रिएल राकैटे-क्रसौस्के ने कहा,कई देशों में, जीवन की डिजिटल गुणवत्ता समग्र जीवन की गुणवत्ता की व्यापक अवधारणा में विलीन हो गई है। अब इसे देखने का कोई अन्य तरीका नहीं है, क्योंकि काम, शिक्षा और अवकाश सहित कई दैनिक गतिविधियां ऑनलाइन की जाती हैं।
उन्होंने कहा, इसलिए उन क्षेत्रों को इंगित करना महत्वपूर्ण है, जिनमें देश की डिजिटल जीवन गुणवत्ता पनपती है और जहां ध्यान देने की आवश्यकता है, जो डीक्यूएल इंडेक्स का सटीक उद्देश्य है।
ई-सुरक्षा स्तंभ यह मापता है कि कोई देश साइबर अपराध का मुकाबला करने के लिए कितनी अच्छी तरह तैयार है, साथ ही देश के डेटा सुरक्षा कानून कितने उन्नत हैं।
इस स्तंभ में भारत बांग्लादेश (85वें) और चीन (79वें) से बेहतर प्रदर्शन करता है।
लेकिन वैश्विक संदर्भ में, अध्ययन के मुताबिक भारत साइबर अपराध से लडऩे के लिए तैयार नहीं है, और देश में डेटा सुरक्षा कानून बहुत कम हैं।
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