रायपुर रायपुर जिले में बड़े पैमाने पर पपीते की खेती को लेकर उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को प्रोत्साहन एवं प्रशिक्षण दिए जाने की सिलसिला शुरू कर दिया गया है। एक उत्पाद-एक जिला योजना के तहत रायपुर जिले का चयन पपीते की खेती के लिए हुआ है। किसानों को उन्नत और रोग-प्रतिरोधी क्षमता वाले पपीते के पौधे उपलब्ध हो सके, इसके लिए इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ हार्टिकल्चर बैंगलोर में विकसित अर्का प्रभात किस्म का पपीता का पौधा रायपुर लाया गया है। इसकी मदद से नर्सरी तैयार कर किसानों को रोपण के लिए अर्का प्रभात पौधा उपलब्ध कराए जाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
रोग-प्रतिरोधक है अर्का प्रभात
पपीता की नई प्रजाति अर्का प्रभात की विशेषता यह है कि यह स्पॉट वायरस रसिस्टेंट है। इसमें वायरस से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा होने के कारण पौधा रोग-रहित रहता है। यह जानकारी 21 जुलाई को एक उत्पाद-एक जिला के तहत पपीता उत्पादन से पोषण की ओर विषय पर आयोजित कार्यशाला में दी गई। जिला पंचायत रायपुर के सीईओ श्री अविनाश मिश्रा के मार्गदर्शन उद्यानिकी विभाग एवं कृषि विज्ञान केन्द्र रायपुर द्वारा इस कार्यशाला का आयोजन लाभाण्डी में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।
कार्यशाला में किसानों को पपीता की खेती के लिए प्रोत्साहित करते हुए उप संचालक उद्यानिकी श्री कैलाश सिंह पैकरा ने कहा कि इसकी खेती के लिए शासन द्वारा किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान तथा बिना ब्याज के 3 लाख रूपए तक का ऋण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पपीता एक पौष्टिक फल है। इसकी पत्ती की भी उपयोगी है। पपीते के स्वस्थ पौधे उद्यानिकी रोपणियांे एवं कृषि केंद्रों पर भी उपलब्ध है। इसकी खेती के लिए विभाग के अधिकारियों एवं प्रक्षेत्र के कर्मचारियों द्वारा किसानों को जानकारी दी जा रही है।