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शिक्षक घोटाला : हाईकोर्ट ने प्राइवेट एजेंसी की गोपनीय क्षेत्र तक पहुंच पर उठाए सवाल

by Bhupendra Sahu
कोलकाता ।  कलकत्ता उच्च न्यायालय ने आज जानना चाहा कि कैसे एक निजी आउटसोर्स एजेंसी को पश्चिम बंगाल बोर्ड ऑफ प्राइमरी (डब्ल्यूबीबीपीई) के गोपनीय क्षेत्र तक पहुंची। भर्ती में ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन (ओएमआर) शीट का इस्तेमाल किया गया था। प्राथमिक शिक्षकों के लिए परीक्षाओं को उस निर्दिष्ट क्षेत्र में संग्रहित किया जाना था। शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच में सामने आया है कि ‘एस बसु रॉय एंड कंपनी’ की पहुंच बोर्ड के गोपनीय क्षेत्र तक थी।
उक्त मुद्दे पर जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने आज सवाल किया कि क्या डब्ल्यूबीबीपीई के लिए किसी निजी संस्था को इस सेक्शन तक पहुंच देने का कोई कानूनी प्रावधान है। न्यायमूर्ति गंगोपाध्याय ने कहा, किसी बाहरी संस्था को गोपनीय क्षेत्र का हिस्सा नहीं माना जा सकता है। बोर्ड के लिए यह सही नहीं है कि वह किसी बाहरी एजेंसी को डेटा या सूचना को अलग से सत्यापित करने की अनुमति दे।
इससे पहले, 2014 में शिक्षकों की पात्रता परीक्षा से संबंधित एक मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति गंगोपाध्याय ने तृणमूल कांग्रेस के विधायक और डब्ल्यूबीबीपीई के पूर्व अध्यक्ष माणिक भट्टाचार्य और एक ही निजी संस्था के बीच संबंध पर सवाल उठाया था। न्यायमूर्ति गंगोपाध्याय ने पश्चिम बंगाल में करोड़ों रुपये के स्कूल भर्ती मामलों की जांच कर रहे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) टीम को इस मामले में भट्टाचार्य से पूछताछ करने का भी निर्देश दिया। भट्टाचार्य, उनकी पत्नी और बेटे के साथ, वर्तमान में भर्ती मामले में उनकी कथित संलिप्तता के लिए न्यायिक हिरासत में हैं।
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