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परिवार से बिछड़ा व्यक्ति भी टूटी शाख की तरह – मिसेज इंडिया कंचन

by Bhupendra Sahu

भिलाई। 24 मई को मिसेज इंडिया लिगेसी का ताज पहनने वाली कंचन गुप्ता का मानना है कि आपका परिवार ही इस दुनिया में आपकी सबसे बड़ी ताकत है. परिवार से बिछड़ा व्यक्ति पेड़ से टूटी हुई शाख की तरह होता है. आज समाज इसी बिखराव का खामियाजा भुगत रहा है. कोरोना काल ने हमें परिवार से जोड़ा और हम एक दूसरे का हाथ पकड़कर इस चुनौती को मात देने में सफल रहे. परिवार है तभी समाज है, संस्कार हैं.
मिसेज इंडिया लिगेसी कंचन अपने निवास पर पत्रकारों से चर्चा कर रही थीं. उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफार्म लोगों को कुछ भी परोस रहा है. रियल से ज्यादा वर्चुअल फ्रेंड्स हैं जो बिना किसी कमिटमेंट के सलाह देते हैं. इससे परिवारों में संवादहीनता की स्थिति बन रही है. ऐसे में बच्चों को पारिवारिक संस्कार देने के रास्ते ही बंद हो जाएंगे.

महावीर जैन स्कूल दुर्ग एवं भिलाई महिला महाविद्यालय से अपनी शिक्षा पूरी करने वाली कंचन ने बताया कि बचपन से ही कुछ अलग करने की इच्छा थी. डांस, म्यूजिक, स्पोर्ट्स ही उनकी दुनिया था. उन्होंने मंच पर अनेक प्रस्तुतियां दीं. बेली-डांस के लिए कई बार प्रशंसित और पुरस्कृत भी हुईं. फिटनेस के प्रति उनकी दीवानगी भी यहीं से आई. वे फिटनेस की फ्री क्लासेस भी लेती रही हैं. रायपुर में KBC-2014 को मोनीष पॉल के साथ होस्ट कर चुकी कंचन डीआईडी सुपरमॉम्स की भी पार्टिसिपेंट रही हैं. कंचन ने बताया कि विवाह से पहले ही उन्हें INIFD से जुड़ने का प्रस्ताव मिला था. वे एक एयर होस्टेस बनना चाहती थीं पर घर से इसकी इजाजत नहीं मिली. विवाह के बाद पति प्रदीप गुप्त एवं सास ने हौसला बढ़ाया. दो संतानों को जन्म देने के बाद उन्होंने इस दिशा में कदम बढ़ाया. पहली ही कोशिश में उनका चयन हो गया. 24 मई, 2023 को गुड़गांव के एपीसेन्टर में आयोजित ग्रैंड फिनाले में उन्हें मिसेज इंडिया लिगेसी का ताज पहनाया गया. इसके साथ ही उन्हें मोस्ट टैलेंटेड मॉम का भी खिताब दिया गया. इस ईवेन्ट का आयोजन DIADEM ने किया था.

कंचन ने अपनी जीत का श्रेय अपने पति प्रदीप एवं सास-ससुर को देते हुए कहा कि उन्होंने कदम-कदम पर न केवल हौसला बढ़ाया बल्कि हर तरह से सहयोग भी किया. इस पूरी यात्रा में उनकी सखियां कमल सैनी एवं नमिता भारद्वाज का भी भरपूर सहयोग रहा है. वे अपने बच्चों शुभ और लाभ के लिए एक आदर्श मां बनना चाहती हैं. वे गर्व से कहती हैं कि जब भी मेरा नाम लिया जाए तो यह भी कहा जाए कि बीपी गुप्ताजी की बहू. उन्होंने बताया कि कालेज के दिनों में मंच पर जाने का मौका तो बहुत मिला, स्टेज फीयर भी टूटा पर एक सम्पूर्ण व्यक्तित्व गढ़ने का जो मौका इस ब्यूटी पेजेन्ट में मिली, वह अभूतपूर्व था. इसके लिए पहले छह माह तक ऑनलाइन ग्रूमिंग होती रही. पर ग्रांड फिनाले से ठीक पहले चार दिन की स्पेशल ग्रूमिंग क्लासेस ने उनका कायाकल्प कर दिया.

अपनी भावी योजनाओं की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि देश में फिनिशिंग स्कूल का कोई कंसेप्ट नहीं है. वे इस कमी को पूरा करने का प्रयास करेंगी. जो कुछ अपनी इस यात्रा के दौरान सीखा है, वे चाहती हैं कि उसका लाभ सभी को मिले. ब्यूटी पेजेन्ट में जाना जरूरी नहीं है, पर अपने व्यक्तित्व को निखाकर आप एक बेहतर मां, एक अच्छी पत्नी और सामाजिक जीवन में औरों की प्रेरणा बन सकती हैं.

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