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देश का युवा कहां जाएगा? सरकार का युवा पर फोकस क्यों नहीं है – वरुण गांधी

by Bhupendra Sahu

इंदौर। सांसद एवं विचारक वरुण गांधी ने कहा है कि भारत के बेहतर भविष्य के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। यदि हम अपने सपनों का भारत बनाना चाहते हैं तो हमें अपेन कुल बजट का दस प्रतिशत शिक्षा पर खर्च करना होगा। गांधी यहां अभ्यास मंडल की ग्रीष्मकालीन व्याख्यानमाला में भारत के लिए भविष्य की राह। अवसर व चुनौतियां विषय पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अपनी बात को कई स्थानों के किस्से और घटनाक्रम से जोड़कर जनता को संदेश देने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि आज हर व्यक्ति यह मानता है कि जीवन ने उसके साथ न्याय नहीं किया है। तो ऐसे लोगों को आंध्र प्रदेश के गरीब परिवार के नेत्रहीन श्रीकांत की कहानी को ध्यान में रखना चाहिए। इसके बाद उन्होंने श्रीकांत के संघर्ष और फिर अमेरिका की एमआईटी में स्कॉलरशिप प्राप्त करने के सफर की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि देश के भविष्य की राह में अच्छे अवसर तब पैदा होंगे जब देश की जनता के बीच पारदर्शिता और जवाबदेही का संदेश जाएगा। वर्तमान में सभी व्यक्तियों को पारदर्शिता के साथ काम करना चाहिए और अपने काम की जवाबदेही को भी स्वीकार करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्ष में 42 करोड़ लोगों ने पब्लिक सेक्टर में नौकरी पाने के लिए परीक्षा दी है। इनमें से नौकरी मात्र आठ लाख लोगों को ही मिल सकी है। ऐसे में यह बड़ा प्रश्न है कि देश का युवा कहां जाएगा? सरकार का युवा पर फोकस क्यों नहीं है? लोन प्रणाली की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि पब्लिक सेक्टर के बैंक 71 प्रतिशत लोन हजार करोड़ से ज्यादा लेनदेन वाले व्यक्ति को देते हैं, जबकि बीस प्रतिशत लोन 100 करोड़ से हजार करोड़ तक के लेनदेन वाले व्यक्ति को देते हैं। ऐसे में आम आदमी को केवल दो प्रतिशत लोन मिल पाता है। इसके पीछे बैंक का कहना होता है कि गरीब व्यक्ति चोरी करते हैं इसलिए उन्हें ज्यादा लोन नहीं दिया जा सकता। इस मामले में एक चौंकाने वाली हकीकत यह भी है कि पिछले दस साल में आम नागरिकों को दिए गए लोन में मात्र 80,000 करोड़ रुपए के बेड लोन थे जबकि देश के बड़े उद्योगपतियों को दिए गए लोन में 5.7 लाख करोड़ रुपए के बेड लोन थे। ऐसे में हमें यह समझ लेना चाहिए कि देश को गरीब नहीं खा रहा है।

उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान का आर्थिक ढांचा हिंदुस्तानी ही होना चाहिए। हम विदेश के आर्थिक ढांचे को अपने देश में खड़ा नहीं कर सकते हैं। शिक्षा के क्षेत्र की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी तेजी से आगे बढऩा चाहती है लेकिन उसमें हमें शिक्षा के साथ रोजगार प्राप्त करने की काबिलियत को विकसित करना होगा। इस समय स्थिति यह है कि शिक्षा के लिए सरकार के बजट में जितना प्रावधान किया जाता है उमसें से 80 प्रतिशत राशि भवन निर्माण पर खर्च करने के लिए होती है जबकि शिक्षकों की ट्रेनिंग के लिए मात्र छह प्रतिशत का प्रावधान किया जाता है। हमारे देश में मध्य प्रदेश सहित सात राज्यों में 42 लाख शिक्षकों की कमी है। देश में यदि बेहतर स्थिति बनाना है तो हमें अपने कुल बजट की दस प्रतिशत राशि को शिक्षा के लिए रखना होगा।
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