नईदिल्ली। घरेलू हवाई यात्री यातायात में तेज बढ़ोतरी और एयरलाइंस की महत्वाकांक्षी विस्तार योजनाओं के साथ देश का नागरिक उड्डयन क्षेत्र मजबूती से आगे बढ़ रहा है। हालांकि, सुधार की इस राह पर कोविड महामारी को लेकर व्याप्त आशंकाओं और भू-राजनीतिक तनाव के चलते वर्ष 2023 में बाधाएं भी आ सकती हैं।
इस साल एयर इंडिया की अपने परिचालन के विस्तार और समेकन की योजना है। इंडिगो बड़े विमानों पर ध्यान दे रही है और जेट एयरवेज भी नए सिरे से कदम बढ़ाने के लिए तैयार है। ऐसे में एयरलाइंस की समग्र लाभप्रदता विमानन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण होगी। गौरतलब है कि पिछले कुछ सप्ताह से घरेलू यात्रियों की संख्या रोजाना चार लाख से अधिक है।
विमानन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के कारण विमान के पुर्जों की कमी हो गई है और विमान की आपूर्ति में देरी हो रही है। साथ ही वैश्विक स्तर पर कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में तेजी भी चिंता का विषय है।
टाटा समूह के घाटे में चल रही एयर इंडिया पर नियंत्रण करने से लेकर आकाश एयर का संचालन शुरू होने तक वर्ष 2022 कई प्रमुख विमानन गतिविधियों के लिए याद किया जाएगा। हालांकि, जेट एयरवेज का भविष्य अभी अनिश्चित बना हुआ है। इस दौरान सरकार की ईसीएलजीएस (आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना) से किफायती विमानन कंपनियों स्पाइसजेट और गो फर्स्ट को जरूर राहत मिली।
विमानन क्षेत्र में यात्रियों और विमानों की संख्या बढऩे के साथ ही हवाई अड्डों की संख्या भी बढ़ रही है। गोवा और अरुणाचल प्रदेश में हाल में नए हवाई अड्डों के उद्घाटन हुए। देश में इस समय परिचालन में शामिल 146 हवाई अड्डे, हेलीपोर्ट और वाटर एयरोड्रोम हैं। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इस आंकड़े को 200 तक पहुंचाना है।
००