चंडीगढ़ । अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी की महासचिव एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने कहा कि मौजूदा सीजन में गन्ने का भाव न बढ़ाकर भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार ने किसानों को बड़ा धोखा दिया है। प्रदेश के किसान गठबंधन सरकार पर विश्वास करके डेढ़ महीने से शुगर मिलों में बिना भाव तय हुए ही इस विश्वास पर गन्ना डाल रहे थे कि दाम में बढ़ोतरी जरूर होगी। बिना भाव तय हुए वे शुगर मिलों में 500 करोड़ से अधिक रुपये का गन्ना डाल चुके हैं, जबकि एक रुपये का भी उन्हें भुगतान नहीं हुआ है। अब भाव न बढ़ाने की बात कहकर गठबंधन सरकार ने किसानों से विश्वासघात किया है।
मीडिया को जारी बयान में कुमारी सैलजा ने कहा कि इस साल मुद्रा स्फीति की दर 7 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। इससे साफ है कि किसान को पिछले साल के मुकाबले गन्ना बेचने पर 7 प्रतिशत का सीधा नुकसान होगा। पिछले साल का रेट 362 रुपये प्रति क्विंटल रुपये था, जिसमें महंगाई को देखते हुए निश्वित तौर पर बढ़ोतरी की जानी चाहिए थी। गन्ने के दाम में बढ़ोतरी न करना गठबंधन सरकार के ईशारे पर किसानों के साथ मिलों द्वारा षड्यंत्र के तहत की गई लूट का सबसे बड़ा उदाहरण है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस सीजन में मिल शुरू होते ही कोई भी भाव तय करने की बजाए भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार ने गन्ने की फसल पर प्रति क्विंटल 7 प्रतिशत वजन कटौती का आदेश तुरंत लागू कर दिया था, ताकि चीनी मिलों को फायदा पहुंचाया जा सके। इसके विपरित पड़ौसी राज्य पंजाब में यह कटौती महज 3 प्रतिशत ही है। इससे पता चलता है कि प्रदेश सरकार पूरी तरह से किसान विरोधी है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि रस निकाले जाने के बाद गन्ने की खोई शुगर मिल से 400 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है, जबकि किसान को गन्ने का भाव 362 रुपये प्रति क्विंटल ही मिलेगा। गन्ने की लागत और किसान की मेहनत को देखते हुए गन्ने का भाव कम से कम 450 रुपये प्रति क्विंटल किया जाना चाहिए था, लेकिन दाम न बढ़ाकर भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार ने किसानों को बड़ा धोखा दिया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि डेढ़ महीने से भी अधिक समय से चीनी मिले चल रही हैं और किसान बिना भाव तय हुए ही अपना गन्ना मिलों को देता रहा है। अभी तक मिलों में पहुंचे गन्ने की एवज में किसी भी किसान को भुगतान भी नहीं किया गया है। यह किसान ही है, जो बिना भाव तय हुए अपने उत्पाद को राष्ट्र हित में चीनी मिलों तक पहुंचा रहा है। कुमारी सैलजा ने कहा कि किसान के अलावा देश में कोई भी ऐसा उत्पाद नहीं बेचता, जिसका भाव बिक्री से पहले तय नहीं होता हो। ऐसे में किसान को किसानों के साथ ठगी न करते हुए गन्ने के दाम में वृद्धि न करने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करते हुए 450 रुपये प्रति क्विंटल दाम तय करने चाहिएं।