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केजरीवाल सरकार की ठगाई और पाखंड उजागर होगा : धर्मेन्द्र प्रधान

by Bhupendra Sahu

नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा किदिल्ली युनिवर्सिटी के विभिन्न कॉलेज से आए शिक्षकों की समस्याओं को सुनते हुए आगामी नगर निगम चुनाव को लेकर विस्तृत चर्चा की। इस मौके पर श्री प्रधान ने शिक्षकों से संवाद के दौरान केजरीवाल सरकार पर दिल्ली की जनता के भरोसे का खून करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार ने शराब नीति से जिस तरह भ्रष्टाचार किया है, उसे दिल्ली वाले कभी नहीं भूलेंगे। इस सरकार ने शिक्षा के फंड से चेहरा चमकाने का काम किया है। डीयुटीए प्रेसिडेंट प्रो ए के भागी ने संवाद सभा में शिक्षकों की समस्याओं को विस्तृत तरीके से सबके सामने रखा। प्रधान ने शिक्षकों से अपील की कि वह आगामी नगर निगम चुनाव में भाजपा को अपना समर्थन दें क्योंकि शिक्षक जिस दिशा में जाएंगे समाज भी उसी दिशा में जाएगा। उन्होंने कहा कि निगम चुनाव में केजरीवाल सरकार की ठगाई और पाखंड उजागर होगा।

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि समाजिक समरसता में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने जो काम किया है, वह किसी भी सरकार में नहीं हो पाया। लेकिन आज दिल्ली में एक ऐसी सरकार बैठी है जिसे समाज से ना कोई मतलब है और शिक्षा का सिर्फ दिखावा है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति सहित आर्थिक आधार पर मोदी सरकार ने सभी को मुख्य विकासधारा में जोडऩे का काम किया है। आने वाले समय में 10 लाख रिक्त पदों को भरके या नया पद सृजन करके नई पीढ़ी को काम का अवसर दिया जाएगा। धर्मेंन्द्र प्रधान ने कहा कि आज दिल्ली में एक ऐसी सरकार बैठी है जिसने शिक्षकों की एक भी समस्या का समाधान करना तो दूर उसने कभी शिक्षकों की बात तक नहीं सुनी। दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक कई बार अपनी समस्याओं को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री के पास गए लेकिन उन्हें खाली हाथ वापस आना पड़ा, लेकिन हम आपके साथ मिलकर आपकी समस्याओं पर चर्चा करेंगे और आपकी अपेक्षाओं पर खरा उतरने की पूरी कोशिश भी करेंगे।

धर्मेंन्द्र प्रधान ने कहा कि दिल्ली में शिक्षा को लेकर पूरी तरह से समझौता किया जा रहा है। स्कूल शिक्षा हो या फिर हायर एजुकेशन की बात हो, दिल्ली सरकार की 50 फीसदी जिम्मेदारी है लेकिन सरकार अपनी जिम्मेदारियों से पीछा छूड़ाने की कोशिश करती रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली राज्य के बजट और खर्चे में अन्य राज्यों की तुलना में काफी अंतर है। दिल्ली के खर्चे अन्य राज्यों की तुलना में 60 फीसदी भी नहीं है लेकिन बावजूद उसके 12 कॉलेजों के शिक्षको का वेतन भी सरकार नहीं दे पाई है।
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