नई दिल्ली। देश में उच्च महंगाई से पिछले 9 महीने से कोई राहत नहीं मिल रही है। इसका असर खपत व निवेश पर पड़ रहा है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्य शशांक भिड़े ने कहा कि बाहरी दबावों यानी आयातित महंगाई की वजह से पिछली तीन तिमाहियों से खुदरा महंगाई की दर ऊंची बनी हुई है। इससे निपटने के लिए बेहतर नीतिगत प्रयास जरूरी हैं।
भिड़े ने कहा कि ईंधन एवं खाद्य वस्तुओं के ऊंचे दाम और अन्य क्षेत्रों पर इसके असर ने महंगाई की दर को अधिक बना रखा है। महंगाई का दबाव बहुत अधिक है। यह भारत की महंगाई से निपटने की रूपरेखा के लिए निश्चित ही एक परीक्षा है। 2022-23 की दूसरी तिमाही में महंगाई उच्च स्तर पर रही। इससे पिछली दो तिमाहियों में भी इसकी दर ऊंची रही थी। खुदरा महंगाई जनवरी, 2022 से 6 फीसदी से ऊपर बनी हुई है। सितंबर में यह 7.41% थी।