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अंतिम दिन बैडमिंटन में बरसा सोना

by Bhupendra Sahu

बर्मिंघम। दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू और लक्ष्य सेन ने सोमवार को यहां फाइनल में जीत दर्ज करते हुए राष्ट्रमंडल खेलों की बैडमिंटन प्रतियोगिता का क्रमश: महिला और पुरुष एकल का स्वर्ण पदक जीता, जबकि सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी भी पुरुष युगल में स्वर्ण पदक जीतने में सफल रही। भारतीय बैडमिंटन खिलाडिय़ों ने सोमवार को अपनी तीनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीते।

सिंधू ने कनाडा की मिशेल ली को 21-15, 21-13 से हराकर 2014 ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों के सेमीफाइनल में उनके खिलाफ मिली हार का बदला भी चुकता कर दिया। दो युवा खिलाडिय़ों के बीच हुए पुरुष एकल फाइनल में दुनिया के 10वें नंबर के खिलाड़ी और विश्व चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता लक्ष्य सेन ने पहला गेम गंवाने के बाद जोरदार वापसी करते हुए दुनिया के 42वें नंबर के मलेशियाई खिलाड़ी एनजी टीजे योंग को 19-21, 21-9, 21-16 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। बाइस साल के योंग के खिलाफ 20 साल के लक्ष्य की यह लगातार तीसरी जीत रही। सात्विक और चिराग की दुनिया की सातवें नंबर की जोड़ी ने पुरुष युगल फाइनल में बेन लेन और सीन वेंडी की इंगलैंड की दुनिया की 19वें नंबर की जोड़ी को 21-15, 21-13 से हराया। सोमवार को 3 स्वर्ण जीतने से पहले मिश्रित टीम के रजत पदक के अलावा किदांबी श्रीकांत ने पुरुष एकल जबकि त्रीशा जॉली और गायत्री गोपीचंद की जोड़ी ने महिला युगल में कांस्य पदक जीता था।
पीवी सिंधू की जीत के साथ ही भारत राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में 200 स्वर्ण पदक हासिल करने वाला चौथा देश बन गया। बर्मिंघम खेलों में 22 गोल्ड के साथ भारत के कुल स्वर्ण पदकों की संख्या 203 हो गयी है।
हाकी में नहीं टूटा आस्ट्रेलिया का तिलिस्मआस्ट्रेलिया का वर्चस्व तोडऩे का भारत का सपना अधूरा ही रहा और एकतरफा फाइनल में विश्व चैम्पियन टीम के हाथों 0-7 की शर्मनाक हार के बाद उसे रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा। लीग चरण में अपराजेय और पूल में शीर्ष भारतीय टीम बिल्कुल फॉर्म में नहीं दिखी। राष्ट्रमंडल खेलों में 1998 में हॉकी को शामिल किये जाने के बाद से सभी 7 स्वर्ण आस्ट्रेलिया ने जीते हैं। भारत ने 2010 में दिल्ली और 2014 में ग्लास्गो में रजत पदक ही जीता था।
भारत के अनुभवी टेबल टेनिस खिलाड़ी अचंता शरत कमल ने राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुष एकल स्पर्धा के फाइनल में सोमवार को यहां इंगलैंड के लियाम पिचफोर्ड को 4 -1 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस स्पर्धा का कांस्य साथियान ज्ञानशेखर ने जीता। शानदार लय में चल रहे 40 साल के शरत ने उम्र को धता बताते हुए रैंकिंग में अपने से बेहतर खिलाड़ी के खिलाफ पहला गेम गंवाने के बाद वापसी करते हुए 11-13, 11-7, 11-2, 11-6, 11-8 से जीत दर्ज की। शरत की विश्व रैंकिंग 39वीं है जबकि पिचफोर्ड 20वें स्थान पर काबिज हैं। इससे पहले साथियान ने इंगलैंड के पॉल ड्रिंकहाल को हराकर टेबल टेनिस पुरुष एकल स्पर्धा का कांस्य पदक जीता। एकल रैंकिंग में 35वें स्थान पर काबिज साथियान ने शुरुआती तीन गेम जीत कर शानदार शुरुआत की लेकिन रैंकिंग में 74वें स्थान वाले खिलाड़ी ड्रिकहॉल ने शानदार वापसी करते हुए मुकाबला 3-3 से बराबर कर लिया। निर्णायक सातवां गेम भी बेहद करीबी रहा। साथियान ने इस रोमांचक मुकाबले को 11-9, 11-3, 11-5, 8-11, 9-11, 10-12, 11-9 से अपने नाम किया।
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