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रोहित पंडा ने 33वें अंतर्राष्ट्रीय जीव विज्ञान ओलंपियाड में रजत पदक जीता… अंतर्राष्ट्रीय समूह परियोजना में भी रोहित को मिला प्रथम स्थान

by Bhupendra Sahu

भिलाई। भिलाई के रोहित पंडा छत्तीसगढ़ के एकमात्र छात्र हैं जिन्होंने 10 जुलाई से 18 जुलाई 2022 तक आर्मेनिया के येरेवन शहर में आयोजित 33वें अंतर्राष्ट्रीय जीव विज्ञान ओलंपियाड (आईबीओ) में भारत का प्रतिनिधित्व किया। सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के विद्युत संगठन के भारी अनुरक्षण विद्युत विभाग के उपमहाप्रबंधक रंजन कुमार पंडा एवं गृहणी श्रीमती रूपाली पंडा के सुपुत्र रोहित पंडा ने जीवविज्ञान विषय में अंतर्राष्ट्रीय ऑलंपियाड में रजत पदक जीत कर भिलाई सहित पूरे देष और प्रदेष का नाम रौषन किया है। रोहित पंडा पूरे प्रदेष में इकलौते छात्र है जिन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए जीवविज्ञान विषय में अंतर्राष्ट्रीय ऑलंपियाड में भारत का प्रतिनिधित्व करने की पात्रता हासिल की थी। इस हेतु प्रतिभागियों को चार स्तर के कड़ी परीक्षाओं से गुजर कर पांचवे स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय ऑलंपियाड हेतु क्वालीफाई करना होता है।

विदित हो कि रोहित का होमी भाभा साइंस एजुकेशन सेंटर, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, मुंबई द्वारा आयोजित बायोलॉजी ओलंपियाड के कठोर दौर को क्वालीफाई करने के बाद, उन्हें भारत के विभिन्न राज्यों के 3 अन्य छात्रों के साथ भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया था।
रोहित ने होमी भाभा साइंस एजुकेशन सेंटर, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, मुंबई में दो सप्ताह के प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद, आर्मेनिया में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय जीव विज्ञान ओलंपियाड में भाग लिया जहां 60 से अधिक देशों के छात्रों ने अपनी भागीदारी दी इसके तहत प्रत्येक देश के सर्वश्रेष्ठ 4 प्रतिभागियों को ही इस अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता हेतु भेजा जाता है।
उल्लेखनीय है कि होमी भाभा साइंस एजुकेशन सेंटर, टीआईएफआर, मुंबई द्वारा भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, खगोलषास्त्र, जूनियर साइंस और गणित शास्त्र में ऑलंपियाड परीक्षा का आयोजन किया जाता है। इसके अंतर्गत भारत में चार स्तरों पर प्रतियोगिता आयोजित होती है। छात्र इन चार स्तरों को पार करने के पष्चात ही पांचवे स्तर के अंतर्राष्ट्रीय ऑलंपियाड हेतु चयनित होते है। इन चार स्तरों से गुजरकर रोहित पंडा ने जीवविज्ञान के अंतर्राष्ट्रीय ऑलंपियाड में जाने की पात्रता हासिल की थी।

इस दौरान प्रतिभागियों को कड़े परीक्षण के विभिन्न दौर से गुजरना होता है। इसके तहत नवीनतम सोच और तीव्र वैचारिक मंथन से गुजारा जाता है। यह कठिन परीक्षण दुनिया भर से सबसे अच्छे नवोदित जीवविज्ञानी चुनने के लिए एक लिटमस टेस्ट साबित होते है। इसमें प्रतिभागियों को कड़े मापदण्ड के तहत दो सैद्धांतिक पेपर (प्रत्येक 3 घंटे की अवधि) और चार व्यावहारिक परीक्षाएं (प्रत्येक 1.5 घंटे की अवधि) देनी होती है। इन कठोर परीक्षण विधियों से गुजरकर भिलाई के रोहित पंडा ने सिल्वर मेडल जीतकर देष व प्रदेष का नाम रौषन किया है।
इसके अलावा जीवविज्ञान के अंतर्राष्ट्रीय ऑलंपियाड के तहत अंतर्राष्ट्रीय समूह परियोजना पर आधारित एक परियोजना प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाता है। इस प्रतियोगिता में रोहित पंडा ने डेनमार्क के एक छात्र और सिंगापुर के एक छात्र के साथ मिलकर जीव विज्ञान में निर्धारित विषय के परियोजना में भाग लिया। यह परियोजना का शीर्षक था ‘पौधे, कवक और वायरस के बीच 3 तरह का सहजीवन है जिसका उपयोग समाज के लिए विभिन्न प्रासंगिक समस्याओं को मिटाने के लिए किया जा सकता है।Ó विभिन्न प्रतिनिधियों और 7 सदस्यीय अंतर्राष्ट्रीय जूरी समिति द्वारा सर्वसम्मति से रोहित के इस परियोजना को सर्वश्रेष्ठ माना। इस प्रकार रोहित पंडा ने अपनी मेधा दिखाते हुए इस परियोजना में भी प्रथम पुरस्कार जीतने का गौरव हासिल किया।
डीपीएस भिलाई के बारहवी में अध्यनरत रोहित पंडा प्रारंभ से ही मेधावी रहे है। इन्हें विज्ञान में विषेष अभिरूचि रही है। रोहित पंडा ने इससे पूर्व इंडियन डिवीजन के साउथ-ईस्ट एषियन मैथेमैटिक्स ऑलंपियाड में सिल्वर मेडल जीतकर भिलाई का नाम रौषन किया है। इसके अतिरिक्त रोहित ने इंटरनेषनल इनफॉरमेटिक्स ऑलंपियाड में प्रथम स्थान प्राप्त कर हांगकांग जाने की पात्रता हासिल की। रोहित के इस उपलब्धि पर भिलाई बिरादरी के गणमान्य लोगों ने बधाई दी है।

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