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राष्ट्रमंडल खेलों में कोई टीम कमज़ोर नहीं, एक बार में एक मैच पर ध्यान देंगे : सुरेंद्र

by Bhupendra Sahu

बेंगलुरू। भारतीय पुरुष हॉकी टीम बर्मिंघम में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों से पहले बेंगलुरू के भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) केंद्र में प्रशिक्षण में जुट गयी है। भारतीय टीम के डिफेंडर सुरेंद्र कुमार ने अपनी तैयारियों के बारे में कहा कि टीम का ध्यान इस समय शारीरिक फिटनेस पर है। सुरेंद्र ने कहा, हमारे प्रशिक्षण सत्र अब भी जारी हैं। हमारा ध्यान मुख्यत: फिटनेस पर है, और हम इस पहलू पर काफी काम कर रहे हैं। हमने अन्य क्षेत्रों को मज़बूत करने पर भी काम किया है। भारत को राष्ट्रमंडल खेलों के लिये इंग्लैंड, कनाडा, वेल्स और घाना के साथ पूल बी में जगह दी गयी है, जहां उनका पहला मुकाबला 31 जुलाई को घाना से होगा। सुरेंद्र ने कहा कि वह किसी भी टीम को हल्का नहीं आंकेंगे और टूर्नामेंट में एक बार में एक मैच पर ही ध्यान केंद्रित करेंगे।

उन्होंने कहा, हम किसी भी मैच को हल्का नहीं आंक रहे हैं। हर टीम स्वर्ण जीतने के लिये ही टूर्नामेंट में आ रही है। वर्तमान में हमारा फोकस घाना के खिलाफ होने वाले पहले मैच पर है।
सुरेंद्र ने कहा, हम उनकी खेल फुटेज का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। हमारे कोच उसी के अनुसार योजना बना रहे हैं और हम मैच के दिन उसी का पालन करने की उम्मीद करेंगे। टूर्नामेंट में कोई टीम आसान नहीं होगी और हम मैच-दर-मैच अपने अभियान पर ध्यान देंगे। भारत एफआईएच पुरुष हॉकी प्रो लीग 2021/22 में तीसरे स्थान पर रहा था। सुरेंद्र का मानना है कि टूर्नामेंट में कठिन टीमों के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करने के अनुभव से बर्मिंघम में भारत को फायदा होगा। सुरेंद्र ने कहा, हमारा लक्ष्य राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतना है। बाकी हमारे प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।
उन्होंने कहा, हमने टोक्यो ओलंपिक 2020 के बाद से जो मैच खेले हैं, वे काफी अच्छे रहे हैं। हम मजबूत टीमों के खिलाफ खेले और इससे हमें वास्तव में फायदा हुआ है। हमने अपनी योजनाओं को अच्छी तरह से क्रियान्वित किया और इस तरह हम उन क्षेत्रों को पहचानने में सक्षम थे जहां हम सुधार कर सकते हैं। हमने शिविर में उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है।
सुरेंद्र ने टीम में अनुभव और युवाओं के मिश्रण की भी प्रशंसा की और बताया कि वरिष्ठ खिलाडिय़ों ने अभिषेक और जुगराज सिंह जैसे युवाओं को क्या सलाह दी है। उन्होंने कहा, हमने खिलाडिय़ों से कहा है कि वे राष्ट्रमंडल खेलों में प्रदर्शन के दबाव को महसूस न करें और उन्हें सामान्य मैचों के रूप में लें। कोच और वरिष्ठ खिलाड़ी भी उन्हें बता रहे हैं कि उनके पास मजबूत टीमों के खिलाफ खेलने का अनुभव है और इसलिए, वे प्रतियोगिता में प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं।
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