Home » ‘आ नो भद्रा: क्रतवो यन्तु विश्वत: को आत्मसात कर रही नई शिक्षा नीति: योगी आदित्यनाथ

‘आ नो भद्रा: क्रतवो यन्तु विश्वत: को आत्मसात कर रही नई शिक्षा नीति: योगी आदित्यनाथ

by Bhupendra Sahu

लखनऊ । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी विचारों से प्रकाशित राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में ज्ञान के सैद्धान्तिक और व्यावहारिक आयामों का बेहतर समावेश है। यह नीति समाज को स्वाबलंबन और आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने में सहायक सिद्ध होगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी होने से विद्यार्थी किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उनका व्यावहारिक व तकनीकी ज्ञान भी समृद्ध होगा।

बुधवार को मुख्यमंत्री अपने सरकारी आवास पर प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के अनेक शैक्षिक संस्थान सराहनीय कार्य कर रहे हैं। भारतीय संस्कृति के ‘आ नो भद्रा: क्रतवो यन्तु विश्वत:Ó के सूत्र वाक्य को आत्मसात करते हुए उनकी बेस्ट प्रैक्टिसेज को शासकीय संस्थानों में लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों की नैक एक्रैडीटेशन की अद्यतन स्थिति की समीक्षा करते हुए सभी पात्र संस्थानों की तत्काल नैक ग्रेडिंग कराये जाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अकादमिक संस्थानों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए। अकादमिक संस्थान डिग्री बांटने के केंद्र बन कर न रह जाएं। समाज के प्रति उनकी जवाबदेही है, उन्हें उसकी पूर्ति भी करनी चाहिए। गुणवत्तापरक शोध पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में स्थानीय समस्याओं पर अन्तर्विषयी शोध कार्यों को प्रोत्साहित किया जाए। शोध के विषय सोशल और नेशनल स्तर पर प्रासंगिक हों। ग्लोबल सिग्नीफिकेन्ट रिसर्च को बढ़ावा देना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की 77.7 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। अत: उन्नत भारत अभियान स्कीम (यूबीए) के तहत अधिक से अधिक शिक्षा संस्थानों को ग्रामीण इलाकों से जोडऩा चाहिए तथा ग्राम्य विकास से संबंधित पाठ्यक्रमों के संचालन पर विशेष बल देना चाहिए। उन्होंने कहा कि उद्योग-अकादमिक सम्बन्धों को बढ़ाना चाहिए। सोशल कनेक्ट के जरिये शिक्षा संस्थानों द्वारा गांवों में लघु उद्योग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने माध्यमिक विद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए करिकुलम एण्ड पेडागॉजी, मूल्यांकन एवं परीक्षा सुधार, शिक्षकों की क्षमता वृद्धि एवं शिक्षकों की नियुक्ति, कौशल उन्नयन की दिशा में और सुधार के लिए विशेष प्रयास की जरूरत बताई।
पाठ्यक्रम निर्धारण की प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि माध्यमिक कक्षाओं में हमें समसामयिक तकनीकी जानकारी देने वाले विषयों को पाठ्यचर्या में शामिल करना चाहिए। आपदा प्रबन्धन, सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग, डेटा सिक्योरिटी, ट्रैफिक मैनेजमेण्ट, फायर सेफ्टी जैसे विषयों की प्रारम्भिक जानकारी भी दी जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सबसे बड़े अन्तर्विभागीय कन्वर्जेंस कार्यक्रम ‘ऑपरेशन कायाकल्पÓ और ‘स्कूल चलो अभियानÓ का 1.33 लाख स्कूलों में सफल क्रियान्वयन हुआ है। विद्यालयों में अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए 6200 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि का निवेश किया गया है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि परिषदीय विद्यालय में बच्चों के दाखिले के साथ ही उनकी यूनीफॉर्म और पाठ्य सामग्री की उपलब्धता हो जाए। परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की यूनीफॉर्म, स्वेटर, स्कूल बैग के लिए सीधे अभिभावक के बैंक खाते में धनराशि भेजी जा रही है। पारदर्शिता और सहजता के लिहाज से इस बदलाव के अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं। इस अवसर पर कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही, उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय, प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल, माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सन्दीप सिंह, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी, मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री एसपी गोयल, अपर मुख्य सचिव कृषि एवं कृषि शिक्षा देवेश चतुर्वेदी, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा मोनिका एस गर्ग, अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला, प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा दीपक कुमार, महानिदेशक एवं विशेष सचिव बेसिक शिक्षा विजय किरण आनन्द सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहेे।
00

Share with your Friends

Related Articles

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More