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श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक सच्चे देशभक्त थे : जेपी नड्डा

by Bhupendra Sahu

नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने केंद्रीय कार्यालय में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित किया। श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर जगत प्रकाश नड्डा ने केंद्रीय कार्यालय में वृक्षारोपण कर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देने की बात कही और कहां की वृक्ष लगाकर देश में पर्यावरण को दूषित होने से बचाया जा सकता है। जेपी नड्डा ने कहा कि भाजपा के करोड़ों कार्यकर्ता देश में डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जन्म दिवस मना रहे हैं। जेपी नड्डा ने कहा कि डॉ. मुखर्जी महान राष्ट्रभक्त, महान देशभक्त, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के द्योतक, महान शिक्षाविद् थे जिनका जन्म 6 जुलाई 1901 को हुआ था। उनकी तीक्ष्ण बुद्धि और महान शिक्षाविद् का परिचायक है कि वे 33 वर्ष की उम्र में कलकत्ता विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर बन गए। उनकी शिक्षा, प्रखर ज्ञान एव विद्वता का सारी दुनिया लोहा मानती है।

डॉ. मुखर्जी 1929 में पहली बार बंगाल विधान सभा के सदस्य बने। 1930 में वैचारिक मतभेद को ध्यान में रखते हुए उन्होने इस्तीफा दे दी और तत्पश्चात वे फिर से शिक्षण कार्य में लग गए। नड्डा ने कहा कि 1940-41 में डॉ. मुखर्जी मजरूल हक के कैबिनेट में बंगाल के वित्त मंत्री बने। वे बंगाल की बहुत सेवा की। आजादी के समय जब लगभग पूरा बंगाल और पंजाब पाकिस्तान में जाने की बात हो रही थी तब डॉ. मुखर्जी ने इस विषय को सबके सामने रखते हुए इसका प्रखर विरोध किया। डॉ. मुखर्जी के कारण बंगाल का एक हिस्सा आज देश में है जो आज पश्चिम बंगाल के रूप में हमलोग देख रहे हैं। नड्डा ने कहा कि डॉ. मुखर्जी तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के पहले कैबिनेट के सदस्य थे। वे उद्योग मंत्री बने और देश का पहल उद्योग नीति बनाकर लागू किया। उन्होंने खादी ग्राम उद्योग की स्थापना की। डॉ. मुखर्जी बहुत कम समय उद्योग मंत्री रहे और इस अल्प समय में उन्होंने औद्योगिक नीति से भारत को मजबूती प्रदान करने का काम किया। डॉ. मुखर्जी ने पंडित नेहरू के विचारों का विरोध करते हुए नेहरु कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की। भारतीय जनसंघ की स्थापना का कारण यह था कि पंडित नेहरू जी की तुष्टिकरण की नीति से वे दुखी, चिंतित और व्यथित थे।

नड्डा ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने कहा था कि पंडित नेहरू जी जो आप धारा 370 लगा रहे हैं वे देश के हित में नही है। उन्होंने नारा दिया कि एक देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान नहीं चलेगा। इस बात को लेकर उन्होंने 11 मई को सत्याग्रह किया और वे जम्मू एवं कश्मीर में बिना परमिट लिए प्रवेश किया। उन दिनों जम्मू एवं कश्मीर में जाने के लिए परमिट लेना अनिवार्य होता था। जम्मू एवं कश्मीर में प्रवेश करते हुए डॉ. मुखर्जी ने कहा था कि यह देश की धरती है यहां आने-जाने के लिए परमिट नहीं लूंगा। 11 मई को उनकी गिरफतारी हुई और श्रीनगर की जेल में डाल दिया गया। डॉ. मुखर्जी की 23 जून को श्रीनगर जेल में ही रहस्मयी तरीके से निधन हुआ। इस घटना को लेकर डॉ. मुखर्जी की माता जी ने प्रधानमंत्री पंडित नेहरू को पत्र लिनखकर इसकी जांच कराने की मांग की थी।

किन्तु पंडित नेहरू ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की रहस्मयी निधन की जांच नहीं करायी। नड्डा ने कहा कि जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के करोड़ों कार्यकर्त्ता डॉ. मुखर्जी से प्रेरणा लेकर एक देश में दो निशान, दो विधान नहीं चलेगा के नारे को लेकर सालों साल तक संघर्षरत रहे। भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व एवं गृहमंत्री अमित शाह की रणनीति ने जम्मू एवं कश्मीर में लागू धारा 370 को निरस्त कर दिया। यह डॉ. मुखर्जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। नड्डा ने कहा कि डॉ. मुखर्जी के पुण्यतिथि 23 मई से लेकर उनकी जन्म जयंती 6 जून तक भाजपा के कार्यकर्त्ता देशभर में वृक्षारोपण कार्यक्रम, अस्पतालों में जाकर लोगों की सेवा करना, गरीबों के घर जाकर उनसे मिलना एवं उनकी समस्याएं दूर करना और सामाजिक कार्य को आगे बढ़ाने का काम करते हैं। नड्डा ने कहा कि भाजपा कार्यकर्त्ता के रूप में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यह है कि राष्ट्र को मजबूत करने के लिए समर्पित भाव से कार्य करें और उनके जीवन से प्रेरणा लें।

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