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दर युक्तिकरण मूल्य श्रृंखला में अक्षमताओं की भरपाई करेगाः सीतारमण

by Bhupendra Sahu

सीतारमण ने संवाददाताओं से कहा, प्रौद्योगिकी अक्षमता से जुड़ी खामियों को दूर कर सकती है लिहाजा राजस्व संग्रह पर इसका सकारात्मक असर पड़ सकता है। लेकिन राजस्व-तटस्थ दर का उल्लंघन किया गया है जो कर प्रणाली के लिए नुकसानदेह है।
चंडीगढ़| वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि दर युक्तिकरण की पहल के तहत जीएसटी दरों में किसी भी बढ़ोतरी का मकसद मूल्य श्रृंखला में अक्षमता की भरपाई करना है। मुद्रास्फीति पर दर युक्तिकरण के संभावित असर से सभी राज्यों के अवगत होने का जिक्र करते हुए सीतारमण ने कहा कि कर दरों में कोई भी बढ़ोतरी कर बोझ की भरपाई भी करेगी।

फिलहाल इस कर बोझ को मूल्य शृंखला में अन्य गतिविधियों से उठाया जा रहा है। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की नीति-निर्धारक इकाई जीएसटी परिषद की यहां आयोजित 47वीं बैठक खत्म होने के बाद सीतारमण ने संवाददाताओं से कहा, प्रौद्योगिकी अक्षमता से जुड़ी खामियों को दूर कर सकती है लिहाजा राजस्व संग्रह पर इसका सकारात्मक असर पड़ सकता है। लेकिन राजस्व-तटस्थ दर का उल्लंघन किया गया है जो कर प्रणाली के लिए नुकसानदेह है।

इसे ठीक करने की जरूरत है। आरबीआई के एक अध्ययन के अनुसार जीएसटी के तहत भारित औसत कर की दर 11.6 फीसदी से भी नीचे आ गई है जो कर प्रणाली की शुरुआत के समय 14.4 फीसदी थी। जीएसटी लागू होने के पहले आई सुब्रमण्यम समिति की रिपोर्ट में कहा गया था कि जीएसटी के तहत राजस्व-तटस्थ दर लगभग 15.5 प्रतिशत होनी चाहिए।

सीतारमण ने कहा कि कुछ मामलों में शुल्क हटाए जाने के कारण भारी रिफंड दिया जा रहा है जिसे ठीक करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, इसकी वजह से फिर से संभावित कर प्रतिफल बिंदुओं को छोड़ दिया गया है। यह प्रणाली की सक्षमता नहीं है।

लिहाजा दर युक्तिकरण से अगर वृद्धि भी होती है तो भी यह अक्षमताओं को पूरा करेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि मंत्रियों का समूह (जीओएम) भी जीएसटी दर के युक्तिकरण को इसी नजरिये से देख रहा है। कराधान प्रणाली में नाकामियां उस समय बढ़ती हैं जब कच्चे माल और तैयार उत्पादों पर अलग-अलग दरों पर कर लगाया जाता है। इससे या तो कर चोरी की स्थिति पैदा होती है या फिर कारोबारी इकाइयां इनपुट टैक्स क्रेडिट का पूरी तरह इस्तेमाल ही नहीं कर पाती हैं।

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