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छत्तीसगढ़ हाट में चल रही है हस्त शिल्प प्रदर्शनी… कांथा वर्क की साड़ियां, लौह और बेल मेटल शिल्प आकर्षण का केन्द्र

by Bhupendra Sahu

रायपुर । राजधानी रायपुर के पंडरी स्थित छत्तीसगढ़ हाट में बस्तर के कांथा वर्क की साड़ियां, बंगाल के वर्धमान जिले में कपड़ों पर होने वाली आकर्षक कारीगिरी और आदिवासी शिल्पियों द्वारा तैयार की गई लौह, कांस्य शिल्प लोगों को आकर्षित कर रही है। छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग द्वारा यहां दस दिवसीय राज्य स्तरीय हस्तशिल्प प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ सहित हरियाणा, बंगाल, ओडिशा सहित विभिन्न राज्यों के हस्तशिल्पियों के उत्पादों के 50 स्टॉल लगाए गए हैं। छत्तीसगढ़ के वनौषधि, वनोत्पाद सहित विभिन्न प्रकार के उत्पादों के साथ ही छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का लुफ्त भी उठाया जा सकता है। यह प्रदर्शनी 31 मार्च तक चलेगी।

बस्तर आर्ट के कांथा वर्क के द्वारा बनाई गई साड़ी विशेष आकर्षण का केंद्र है। माना हस्तशिल्प केंद्र की श्रीमती मैयत्री बॉस ने बताया कि बस्तर आर्ट का कांथा वर्क की साड़ी बनाने में करीब 3 से 4 महीने का समय लगता है। इसमें बस्तर के पारंपरिक पेड़-पौधे, जीव जंतुओं जैसे कुल 24 थीम को छोटी सुई और धागा के माध्यम से साड़ी में उकेरा जाता है। एक साड़ी की कीमत 7000 से 15000 रूपए तक है। हस्त शिल्प संस्थान माना की प्रबंधक श्रीमती मैत्री ने बताया कि वे अब तक 300 से अधिक कारीगरों को इसका प्रशिक्षण दे चुकी हैं। वे स्थानीय स्तर पर ऐसे साड़ियों का उत्पादन कर रोजगार प्राप्त कर रहे हैं।

कोंडागांव के गांव किड़ईछपेड़ा के कारीगर श्री सागर विश्वकर्मा बताते है कि उनके द्वारा लोहे के पट्टियों को कलाकृतियों के अलग-अलग हिस्से का रूप प्रदान किया जाता है। जिससे लोक नर्तक बिगुल तथा अन्य आदिवासी वाद्ययंत्र की कलाकृति बनाई जाती है। जिससे रंगरोगन का सुंदर रूप प्रदान किया जाता है, इसकी बाजार में अच्छी मांग है। प्रदर्शनी में बांस से बनी सजावटी वस्तुओं के साथ ही घरों में उपयोग में आने वाले सोफे भी बिक्री के लिए रखे गए है। इस समानों को गरियाबंद के स्थानीय कारीगरों ने तैयार किए है। स्टॉल में बांस के सोफा, टेबल के साथ ही घरों में सजावट के लिए अन्य उपयोगी सामग्री भी बेची जा रही है। प्रदर्शनी में रायगढ़ जिले के बेल मेटल शिल्पियों द्वारा तैयार की गई मूर्तियां, सजावटी समान, दैनिक उपयोग की वस्तुएं जैसे-लाईट लैम्प, ज्वेलरी आदि की बिक्री की जा रही है। सारंगढ़ के बेल मेटल शिल्पी मनोज कुमार ने बताया कि स्थानीय कलाकारों द्वारा पीतल धातु से बनाए गए बेल मेटल से तैयार की गई सजावटी समान की शहरों में विशेष मांग रहती है। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र में 400 से अधिक कुशल कारीगर इस कार्य से जुड़े है। बेल मेटल की सजावटी वस्तुओं के निर्माण में मोम और गूगल धूप का भी उपयोग किया जाता है। उन्होंने बताया कि बेल मेटल से बनाई गई वस्तुओं को राजधानी दिल्ली सहित अन्य राज्यों में भी लोग पसंद करते हैं, इससे कारिगरों को प्रोत्साहन मिल रहा है।

जीवन वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा सेनेटरी नेपकीन निर्माण का किया जा रहा कार्य जनमानस के लिए प्रेरणादायी है। इस फाउंडेशन की प्रतिनिधि श्रीमती अस्मिता बताती है कि उनकी संस्था में 600 से 700 महिलाएं जुड़ी हुई जो अलग-अलग मोहल्ले गांव में जाकर सेनेटरी नेपकीन के प्रति जागरूक करती है। इन महिलाओं द्वारा सेनेटरी नेपकीन बनाया जाता है, जो बाजार में अन्य निजी कम्पनियों द्वारा बनाए गए सेनेटरी नेपकीन की अपेक्षा सस्ती है। यह कॉटन से बनी है जो महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद है। उन्होंने बताया कि हम महिलाओं को सेनेटरी नेपकीन के प्रति जागरूक कर उन्हें कई बीमारियों से बचा रहे है और इन समूह की महिलाओं को अच्छी आय भी हो रही है।

पंडरी हाट में लगाए प्रदर्शनी में खादी के बने हुए कुर्ते, शर्ट तथा अन्य परिधान उपलब्ध है। खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अधिकारी श्री डढ़सेना ने बताया कि यह लोगों को काफी कम दरों पर उपलब्ध है। खादी के कपड़े गर्मी में ठण्डक प्रदान करते है। वहीं प्रदर्शनी में वन विभाग के संजीवनी तथा उड़ान महिला कृषक प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड कोण्डागांव के स्टॉल में वनों उत्पाद जैसे- महुआ, त्रिखुर, आंवला से बनाए गए आचार व अन्य सामग्री उपलब्ध है।

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