नयी दिल्ली। खुदरा व्यापारियों के मुख्य संगठन कैट ने भारत में ई-कॉमर्स मंचों में निष्पक्षता के अभाव, ऐसे मंचों द्वारा समानों पर अतिशय छूट और ग्राहकों से संबंधित सूचनाओं का अनुचित प्रयोग कर बाजार प्रतिस्पर्धा को प्रभावित किए जाने तथा प्लेटफॉर्म पर नए उत्पादों की घोषणा जैसे व्यवहार की शिकायत की है और इस क्षेत्र के नियमन के लिए विनियामक प्राधिकरण गठित करने की सिफारिश की है।
कैट ने ई-कॉमर्स पर पचास पृष्टों का श्वेत-पत्र जारी किया। कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने राजधानी में संवाददाता सम्मेलन में इसे जारी करते हुए कहा, श्वेत-पत्र में सुझाव दिया गया है कि ई-कॉमर्स नीति को प्लेटफॉर्म तटस्थता की कमी, अत्यधिक छूट, डेटा के अनुचित उपयोग आदि से उत्पन्न चिंताओं को दूर करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए की इस उद्योग के लिए एक समावेशी दृष्टिकोण अपनाया जाए।
श्वेत-पत्र में इस क्षेत्र के लिए की गयी सिफारिशों में कैट ने सुझाव दिया है कि ई-कॉमर्स के क्षेत्र में एक अधिकार संपन्न विनियामक प्राधिकरण होना चाहिए जो समावेशी विकास को बढ़ावा देने और नियमों को लागू करने में सक्षम हो और सभी पक्षों के हितों की रक्षा कर सके।
कैट के मुताबिक ई-कॉमर्स कंपनियों को केवल शुद्ध रूप से एक निष्पक्ष डिजिटल बाजार मंच के रूप में काम करने की छूट होनी चाहिए और उन्हें ग्राहकों के डेटा का कहीं और इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। श्वेत-पत्र में सिफारिश की गयी है कि इनवेंटरी (अपने माल का स्टॉक) के साथ काम करने वाली डिजिटल वाणिज्यिक इकाइयों को ई-स्टोर के रूप में परिभाषित किया जाए। कैट ने कहा है कि भारत में ई-वाणिज्य क्षेत्र जिस तेजी से बढ़ रहा है उसमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि बाजार में व्यापारियों, उपभोक्ताओं और सभी संबद्ध उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा हो।