भिलाई। रविवार 13 मार्च को भिलाई के मैत्रीबाग में फ्लावर शो का आयोजन किया जा रहा है। बीएसपी के उद्यानिकी विभाग द्वारा इसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। रविवार को होने वाले फ्लावर शो में विभिन्न फूलों के साथ ही फल सब्जियों की भी प्रदर्शनी लगेगी। कल होने वाले फ्लावर शो में लगभग 60 हजार से ज्यादा पर्यटकों के पहुंचने की संभावना है। यह तो सभी जानते हैं कि मैत्री बाग में हर फ्लावर शो का आयोजन किया जाता है। क्या आप यह जानते हैं कि भिलाई में फ्लावर शो का क्या इतिहास है और हर साल फरवरी माह में ही इसका आयोजन क्यों किया जाता है। तो आइए आज हम आपकों बता रहे हैं फ्लावर शो का इतिहास।
भारत व रूस की मित्रता के प्रतीक के रूप में भिलाई में मैत्रीबाग के निर्माण की आधार शिला 26 फरवरी 1961 को रखी गई थी। मैत्री बाग को आकार लेने में एक दो बल्कि पूरे 11 साल का समय लगा। 1972 तक मैत्री बाग ने आकार लिया। यह समय ऐसा था कि आसपास कुछ नहीं था। छोटे छोटे गांव हुआ करते थे। बसाहट भी आज के जैसी नहीं थी। 1974 में पहली बार मैत्रीबाग में फ्लावर शो के आयोजन की रूपरेखा बनाई गई।
1974 में हुआ था पहली बार फ्लावर शो
मैत्री बाग के प्रभारी डॉ. एनके जैन ने बताया कि 1974 में पहली बार फ्लावर शो कराया गया। फ्लावर शो कराने का सबसे बड़ा उद्देश्य लोगों को फूलों व पेड़ पौधों के प्रति जागरुक करना था। शुरुआत में कम संसाधनों के बीच इसकी शुरुआत की गई। इसके बाद साल दर साल इसका दायरा बढ़ता गया। फ्लावर शो के कंटेंट के कारण लोगों में भी जागरुकता आई। वर्तमान में फ्लावर शो में भाग लेने वालों की सैकड़ों में है और इसे देखते 60 हजार से ज्यादा लोग पहुंचते हैं।
तरह तरह के फूलों की प्रदर्शनी
डॉ जैन ने बताया कि बागवानी को बढ़ावा देने के लिए प्रतिवर्ष फरवरी के प्रथम या द्वितीय सपताह में फ्लावर शो का आयोजन प्रबंधन द्वारा किया जाता है। कार्यक्रम की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हर साल 50 से 60 हजार लोग फ्लावर शो देखने पहुंचते हैं। फ्लावर शो में तरह तरह के फूलों को प्रदर्शित किया जाता है। यही नहीं यहां इन फूलों की विभिन्न प्रजातियों की जानकारी भी दी जाती है। साथ ही पेड़ पौधों से लेकर फल व सब्जियों की वैरायटी भी इस फ्लावर शो की खासियत है।
(साभार : CINA)