Home » बरसात में भी पं.प्रदीप मिश्रा के शिव कथा को सुनने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे … भजन और पूजा पाठ में ऐसा दृश्य उभरा मानो साक्षात भगवान शिव स्वयं यहां आ गये हो

बरसात में भी पं.प्रदीप मिश्रा के शिव कथा को सुनने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे … भजन और पूजा पाठ में ऐसा दृश्य उभरा मानो साक्षात भगवान शिव स्वयं यहां आ गये हो

by Bhupendra Sahu

भिलाई । सेक्टर 7 में स्थित दशहरा मैदान में सीहोर वाले महाराज पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा शिव महापुराण कथा का तीसरा दिन रहा पानी बरसात इसके बावजूद श्रद्धालुओं की संख्या कम के बजाय बढ़ती ही चली गई लोगों ने सूज बूझ बड़ी समझदारी से सभी व्यवस्था को बनाते हुए अपने स्थान पर एक किट खड़े होकर ध्यान से पंडित जी के प्रवचन का अमृतवाणी का पूर्ण लाभ लिए। मां कामाख्या समिति के सारे सदस्य एवं बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा निरंतर सेवा कार्य संभाला हुआ है और लोगों ने भी अपने शालीनता का परिचय दिया है प्राकृतिक बरसात के कारण थोड़ी व्यवस्था में ऊपर-नीचे हुआ लेकिन लोगों ने बहुत ही सहनशीलता का परिचय दिया और कार्यक्रम बहुत ही हर्षोल्लास के साथ आज का भी संपन्न हुआ हजारों श्रद्धालु आज उपस्थित रहे पूरे कार्यक्रम के दौरान पर बजरंग दल के संयोजक रतन यादव का भी सतत निगरानी और मार्गदर्शन मिल रहा है।

भारी बरसते पानी में भी श्रोता गढ़ में बड़ा आनंद और उत्साह का माहौल देखा गया भजन कीर्तन और पूजा पाठ पर ऐसा आनंद आ रहा था की साक्षात भगवान शिव आज स्थान पर स्वयं उपस्थित हो गए हैं पंडित जी ने अपने अमृत वचनों से जो कहानी बताएं जो कथा बताएं सभी श्रद्धालु आनंद से झूम उठे कथा इतना भावनात्मक था परमेश्वर के प्रति आस्था और विश्वास को के बंधुओं को एक विवाहित परिवार का संतान नहीं हो रहा था शिव की कथा के दौरान उस परिवार में पति पत्नी ने भगवान शिव से प्रार्थना की और अपनी मनोकामना के रूप में संतान प्राप्ति की कामना की और परमेश्वर से शिव भगवान से कहां मनोकामना पूर्ण होने पर सोने से जडि़त करधन मैं आपको वेट करूंगा शिव तो भोले भंडारी हैं वह अपने भक्तों की मनोकामना तत्काल पूर्ण करने वाले होते हैं 1 साल बाद उस परिवार के घर में संतान का सुख प्राप्त हुआ और उन्हें अपनी प्रतिज्ञा याद थी मंदिर जाकर पंडित जी से कहा पंडित जी शिव भगवान ने मेरी सुनी गोद में संतान का सुख दे दिया है और मैं अपने अपने वचन के अनुसार सोने से जड़ी गर्दन भेंट करना चाहता हूं मुझे नाम शिव भगवान का दे दीजिए पंडित जी ने तत्काल देख धागा से नाम लेकर दे दिए वह परिवार सुनार के यहां जाकर सोने से जडि़त करधन बनवाएं बनने के बाद उस आभूषण को पंडित जी को बैठकर पहनाने के लिए कह दिए पंडित जी ने जब सोने से जडि़त आभूषण को उन्हें पहनाया तो वह कुछ बड़ा हो गया फिर उसे सोनार दुकान ले जाकर छोटा किया गया सोनार के द्वारा सोनार के द्वारा छोटा यह जाने के बाद उस परिवार ने पंडित जी के पास भेंट कर पहनाने के लिए विनती की पंडित जी ने विनती स्वीकार कर शिव भगवान में फिर से उन्हें आप सोने से जुड़े आभूषण को पहना है पुन: वह आभूषण फिर एक साथ बड़ा हो गया ।

पंडित जी कथा सुनाते सुनाते हैं श्री कृष्ण की बाल लीला कथा याद आ गई जैसे यशोदा मां भगवान श्री कृष्ण को रस्सी से पेड़ में बांधते रहते हैं और रस्सी छोटी हो जाती है वैसी बार-बार सोने से गणित करधन शिव भगवान की एक हाथ बड़ी हो जाती है फिर पंडित जी ने निवेदन किया और कहां अब तो सोनार को यहां आकर ही नाप लेना पड़ेगा जो स्वर्णकार थी उसका नाम नरहरी था अंदर हरि स्वर्णकार को पता ही नहीं था कि भगवान अपने भक्तों से मिलना चाह रहे थे और मिलने के कारण ऐसी परिस्थितियां निर्मित करती थी नरहरी स्वर्णकार ने कहा मैं मेरी आंखों में पट्टी बांध दीजिए मैं सीधा श्री हरीश शिव का ही दर्शन करूंगा हरी विठ्ठल के मंदिर में पांडुरंगा के मंदिर में कमर पर जो हाथ फेरा श्रीपति को लगा यह तो मल्लिका अर्जुन है कहीं मैं मल्लिकार्जुन के मंदिर में तो नहीं हाथ में शिवलिंग जैसा लग रहा था जीने से थोड़ी पट्टी ढीली कर लूं और ढीली करके वह देखा यह तो पंढरीनाथ है फिर पट्टी को कस के बाद लिया यह तो शिवलिंग नहीं है उतने में ही मेरे नाथ मूर्ति में से प्रगट हो गए और कहा अरे ओ सोनी अरे ओ स्वर्णकार मुझ में ही शिव है मुझ में ही नारायण है मुझ में ही शंकर है मैं हूं त्रिकालदर्शी स्वर्णकार श्री हरि ने कहा मैं कैसे मान लूं मेरा शिवलिंग कहां है इतने में ही भगवान नारायण नीचे बैठ गए अपने सिर पर शिवलिंग की पिंडी का दर्शन करा दिया पूरे भारत में आज एक ही स्थान पर है जहां पंढरीनाथ पंढरपुर में भगवान विष्णु का मंदिर है जहां विष्णु भगवान की सिर पर शिवलिंग विराजमान है वह पंडरीनाथ का मंदिर हरी विठ्ठल के नाम से जाना जाता है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में कामाख्या समिति के सभी सदस्य टुमन वर्मा, रुक्मणी बलराम जी इंदु लाल साहू प्रशांत सिंह अमोल शैलेश गौरव किरण अवकाश नरेश धनुष साहू लक्ष्मी पूनम आदि विशाल ताम्रकर रवि निगम कमल साव ज्योति शर्मा राकेश सिन्धे सचिन पटने गौरव साहू और विशेष रूप से वीरेंद्र बघेल की भूमिका निश्चित ही सराहनीय है।

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