नयी दिल्ली । व्यक्तिगत आयकर वसूली के आंकड़ों के अनुसार कोविड-19 महामारी का देश के अमीर लोगों के वित्तीय स्वास्थ्य पर बहुत कम असर रहा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2020-21 में व्यक्तिगत आयकर वसूली 4.69 लाख करोड़ रुपये रही जो वित्त वर्ष 2019-20 की 4.80 लाख करोड़ रुपये की तुलना में केवल 2.3 प्रतिशत रही। वर्ष 2018-19 में व्यक्तिगत आयकर की वसूली 4.61 लाख करोड़ रुपये थी। इनमें ब्याज, वेतनेत्तर आय और आय तथा व्यय पर कर भी शामिल हैं।
गौरतलब है कि भारत में कोरोना वायरस संक्रमण की महामारी फैलने पर सरकार ने मार्च 2020 के उत्तरार्ध में लोगों की आवाजाही पर सख्त पाबंदियां लगा दी थी। वित्त वर्ष 2020-21 में कोरोना का पूरी अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ा था और देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) एक साल पहले की तुलना में 7.3 प्रतिशत गिर गया था।
ग्रांट थॉर्टन एडवाइजरी प्रा लि के रियाज ठिगना ने कहा, इस दौरान उच्च आय वर्ग की अपेक्षा निम्न आय वर्ग के लोगों की नौकरियां ज्यादा गयीं। दूसरे, कोविड के दौरान दूरसंचार, सूचना प्रौद्योगिकी और औषधि क्षेत्र ने न केवल होटल/पर्यटन क्षेत्र में हुए नुकसान की भरपायी की बल्कि और भी अच्छा प्रदर्शन किया था।
इस दौरान सरकार ने प्रत्यक्ष कर राजस्व को बचाने के लिए कई कद उठाए। वसूली सुधरने और स्वैच्छिक तरीके से अनुपालन बढ़ाने, करापवंचन को रोकने तथा डिजिटल लेन-देन बढऩे तथा कराधार में विस्तार के उपायों से कर वसूली में सुधार हुआ।
अनुपालन बढ़ाने के लिए करदाताओं को पहले से भरे आयरक विवरण फार्म भेजे जा रहे हैं। देश की 130 करोड़ से अधिक की आबादी में अभी केवल करीब 1.5 करोड़ लोग ही आयकर चुकाते हैं। इस समय वार्षिक 2.5 लाख रुपये तक की आय को कर से छूट मिली है। कोविड़ के दौरान जिन लोगों की नौकरियां गयीं, उनमें ज्यादा तर इसी आय वर्ग के थे।
चालू वित्त वर्ष 2021-22 में सात दिसंबर 2021 में व्यक्तिगत आय कर की वसूली 3.61 लाख करोड़ रुपये रही।
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