इसमें क्षेत्र के अलग-अलग गांवों के 15 महिला और पुरूष लोगों ने उत्साह के साथ भाग लिया। उल्लेखनीय है कि लैंटाना एक विदेशी प्रजाति का पौधा है, जिसका उपयोग मुख्यतः साज-सज्जा के लिए अंग्रेजो के द्वारा भारत लाया गया था। लैंटाना के वैसे तो बहुत सी उपयोगिता है, जिसमें औषधि, फर्नीचर, विद्युत उत्पादन, ब्रिकेट्स आदि प्रमुख हैं, किन्तु इसके सिल्विकल्चर ऑपरेशन (लैंटाना उन्मूलन) को उपयोगी बनाने और जंगलो से लैंटाना की समस्या को दूर करने के प्रयास हेतु फर्नीचर निर्माण को महत्व दिया जा रहा है।

इस संबंध में वन मण्डलाधिकारी जशपुर श्री कृष्ण कुमार जाधव ने बताया कि लैंटाना से फर्नीचर निर्माण के क्षेत्र में लोगों की अधिक रुचि बन रही है और लोगो नई वस्तुओं को बनाने के लिए प्रेरित दिखे रहें हैं। प्रशिक्षण में लैंटाना से मोबाइल स्टैंड, फ्लावर पॉट, पेन स्टैंड, टोकरी, टी ट्रे, मंदिर, छोटा स्टूल, कुर्सी ,टेबल, सोफा सेट, मिरर हेंगर, चाबी हेंगर आदि सामग्री लोगों को बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया गया है। लोगो ने भी प्रशिक्षण में बहुत रूचि लेते हुए नई-नई वस्तुओं को बनाने में दिलचस्पी दिखाई।