मंत्री श्री चौबे ने कहा है कि जिन क्षेत्रों में ग्रीष्मकालीन धान की उपज ली जाती है, उन क्षेत्रों में उपयुक्त वैकल्पिक फसलों के बीज की व्यवस्था त्वरित रूप से   पर्याप्त मात्रा में किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा है कि वैकल्पिक फसल एवं उतेरा फसलों जैसे अलसी, तिवड़ा, बटरी, सरसों की खेती के लिए कृषकों को प्रोत्साहित किया जाए एवं प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए।
कृषि मंत्री श्री चौबे ने विकासखण्ड स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों एवं विभागीय अधिकारियों को दिए है। उन्होंने कहा है कि प्रशिक्षण में निजी सिंचाई स्त्रोत वाले कृषकों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। बैठक में विशेष सचिव कृषि विभाग श्री एस.भारतीदासन, जल संसाधन, प्रबंध संचालक, बीज विकास निगम, उप महाप्रबंधक बीज निगम, कृषि विभाग के अपर संचालक एवं संयुक्त संचालक, मुख्य अभियंता, राज्य विद्युत वितरण कम्पनी, समेती के उप संचालक एवं कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।