नई दिल्ली । केन्द्रीय विद्युत सचिव आलोक कुमार ने 28 अक्टूबर को ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास को-फायरिंग की स्थिति की समीक्षा बैठक ली। बैठक में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, एनटीपीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, मिशन निदेशक-राष्ट्र जैव मिशन और विद्युत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। विद्युत मंत्रालय ने पहले ही कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास के इस्तेमाल पर राष्ट्रीय मिशन की स्थापना की है, ताकि खेत में पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण के समस्या का समाधान किया जा सके और थर्मल पावर उत्पादन के कार्बन फुटप्रिंट्स को कम किया जा सके, जो देश में ऊर्जा गति को समर्थन करेगा क्योंकि तय तय किया गया है कि देश और हमारा लक्ष्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की ओर बढऩा है। मिशन वर्तमान में पूरी तरह से कार्य कर रहा है और ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास को-फायरिंग को प्रोत्साहित करने और समर्थन देने के लिए कदम उठा रहा है।
मिशन बायोमास आपूर्ति श्रृंखला के विकास, हितधारकों को संवेदनशील बनाने और उभरते उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए कई पहल उठा रहा है। हाल ही में इस महीने में फरीदाबाद, हरियाणा और नंगल, रोपड़ में दो प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। दोनों कार्यक्रमों में क्षेत्र के किसानों की सक्रिय भागीदारी देखी गई, जिसमें उन्हें मिट्टी की उत्पादकता पर फसल अवशेषों के जलने के नकारात्मक प्रभाव और टीपीपी में बायोमास को-फायरिंग की मूल्य श्रृंखला में भाग लेकर अपनी आय बढ़ाने के तरीके को लेकर जागरूक किया गया। निकट भविष्य में इस तरह के और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। इसके अलावा, थर्मल पावर प्लांटों में बायोमास के पर्यावरण के अनुकूल उपयोग के लाभ के संबंध में बड़े पैमाने पर विज्ञापन और मीडिया अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, अक्टूबर 2021 के महीने में लगभग 1400 टन बायोमास का इस्तेमाल किया गया है और अब तक कुल 53000 टन बायोमास को बिजली संयंत्रों में हरित ईंधन के रूप में उपयोग किया जा चुका है। सबसे अधिक प्रभावित छह राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा, यूपी, दिल्ली, राजस्थान और एमपी में पराली जलने की घटनाओं में 2020 में इसी अवधि की तुलना में 2021 में अब तक 58.3त्न की कमी आई है। उम्मीद है कि नवगठित राष्ट्रीय मिशन के माध्यम से एमओपी के प्रयास उत्तर पश्चिम भारत में वायु प्रदूषण को कम करने के साथ-साथ कृषि भूमि की उर्वरता के नुकसान को रोकने और किसानों, आपूर्तिकर्ताओं और बायोमास ईंधन निर्माताओं के लिए एक स्थायी आय स्रोत प्रदान करने में सक्षम होंगे।