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आदिवासी महोत्सव के माध्यम से आदिवासी संस्कृति को विश्व पटल पर प्रदर्शित करने का मिलता है मंच-मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम

by Bhupendra Sahu

दुर्ग । संभाग स्तरीय आदिवासी नृत्य का आयोजन 19 व 20 अक्टूबर को कला मंदिर सिविक सेंटर भिलाई में किया गया। संभाग स्तरीय आदिवासी महोत्सव में संभाग के दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, राजनांदगांव एवं कबीरधाम जिले के 12 नृतक दलांे के द्वारा प्रस्तुति दिया गया। महोत्सव में शामिल दलों में प्रथम स्थान के लिए जय बुढ़ा देव कर्मा नृत्य दल ग्राम कोदवा (गंडई) राजनांदगांव को, जय सेवा आदिवासी नृत्य दल ग्राम लिमोरा (बालोद) को द्वितीय एवं तृतीय स्थान के लिए जय बुढ़ा देव आदिवासी सांस्कृतिक नृत्य दल ग्राम खेड़ेगांव मानपुर राजनांदगांव को पुरूस्कृत किया गया। समापन अवसर पर प्रदेश के गृहमंत्री श्री ताम्रध्वज साहू एवं आदिम जाति व अनुसूचित जाति विकास मंत्री श्री प्रेमसाय सिंह टेकाम उपस्थित हुए।

महोत्सव को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्री टेकाम ने कहा कि राज्य में आदिवासी संस्कृति की अपनी विशिष्ट पहचान है। आदिवासी नृत्य के माध्यम से हमें प्रकृति का दर्शन व महत्व देखने को मिलता है। आदिवासी अपनी विशिष्ट और अनोखी कला को वर्षों से संजोए रखे हैं। राज्य सरकार के द्वारा आदिवासी महोत्सव का आयोजन करने से इन्हें एक अवसर मिला है। जिसके माध्यम से आदिवासी संस्कृति को विश्व पटल पर प्रदर्शित करने का अवसर मिला है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गृह मंत्री श्री साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य की मूल पहचान आदिवासी संस्कृति और परंपरा से है। आदिवासी समाज प्रकृति के पूजक हैं और इस विरासत को निरंतर आगे बनाए हुए हैं। आदिवासी महोत्सव में अनेक विलुप्त होती जा रही नृत्य व संस्कृति को जीवित रखने का मंच मिला है। आदिवासी महोत्सव से हमें भाईचारा और अनेक विविधता का दर्शन भी होता है। कला और संस्कृति जनजाति समुदाय की विशिष्ट पहचान होती है। आदिवासी नृत्य के साथ गीत एवं पारंपरिक वेश भुषाओं का अनुठा मिश्रण देखने को मिलता है। आदिवासी नृत्य में अनेक वाद यंत्रों और संगीत का जीवन प्रस्तुति देखने को मिलता है। उन्होंने इस अवसर पर महोत्सव में शामिल नृतक दलों को शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम का आयोजन जिला प्रशासन और आदिवासी विकास विभाग के मार्गदर्शन में किया गया।

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