नई दिल्ली । छह अक्तूबर को शुरू हुई भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक आज समाप्त हो गई। इस दौरान महंगाई बढऩे और कोरोना की दूसरी लहर के बाद आर्थिक गतिविधियों के पटरी पर लौटने का हवाला देते हुये भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रेपो दर तथा अन्य नीतिगत दरों को यथावत रखने का फैसला किया है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांता दास की अध्यक्षता में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समीति की आज समाप्त तीन दिवसीय द्विमासिक समीक्षा बैठक में सभी नीतिगत दरों को अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया गया। रेपो दर को चार प्रतिशत, रिवर्स रेपो दर को 3.35 प्रतिशत, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी दर को 4.25 प्रतिशत और बैंक दर को 4.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है। नकद आरक्षी अनुपात चार प्रतिशत और एसएलआर 18 प्रतिशत पर बना रहेगा।
बैठक के बाद दास ने कहा कि पिछले वर्ष कोरोना के शुरू होने के बाद से यह मौद्रिक नीति की 12वीं घोषणा है और इस दौरान 100 से अधिक उपाय किये गये हैं। अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर आ रही है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि रिजर्व बैंक लगातर ये कोशिश करेगा कि महंगाई दर टारगेट के भीतर रहे। उन्होंने कहा कि रूक्कष्ट के सभी 6 सदस्यों ने सहमति से पॉलिसी रेट में बदलाव ना करने का फैसला किया है। दास ने कहा कि इकोनॉमी मे तेजी से सुधार के संकेत मिल रहे हैं। लेकिन कोर इनफ्लेशन अब भी चुनौती बना हुआ है। जुलाई-सितंबर में खुदरा महंगाई दर अनुमान से कम था। शक्तिकांत दास ने कहा कि रूक्कष्ट की पिछली बैठक के मुकाबले इसबार भारत की स्थिति ज्यादा बेहतर है। ग्रोथ मजबूत हो रही है और महंगाई दर पर उम्मीद से बेहतर स्थिति में है। मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने फिस्कल ईयर 2021 के लिए त्रष्ठक्क की ग्रोथ रेट 9.5त्न पर बरकरार रखा है।
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