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अखंड सौभाग्य का प्रतीक है हरितालिका तीज…महिलाएं अखंड सौभाग्य और अपने वैवाहिक जीवन को सुखी बनाने के लिए रखती है व्रत…

by Bhupendra Sahu

दन्तेवाड़ा । हर साल भाद्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को तीज का त्यौहार मनाया जाता है। यह दिन माता पार्वती को समर्पित होता है। मान्यता है कि इसी दिन महादेव ने माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें विवाह के लिए हाँ कहा था। इसीलिए महिलायें अपने पति की लंबी आयु के लिए यह व्रत रखती हैं। माता पार्वती और महादेव का पूजन करने से विवाहित स्त्री का वैवाहिक जीवन सुखमय हो जाता है। हरितालिका तीज सुहागिन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और अपने वैवाहिक जीवन को सुखी बनाने के लिए व्रत रखती हैं। इस व्रत में महिलाएं माता गौरी से सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद माँगती हैं। दरअसल यह व्रत निर्जल रखा जाता है इसी कारण यह व्रत कठिन व्रतों में से एक माना जाता है वहीं कुँवारी कन्यायें भी हरितालिका तीज व्रत रखती हैं उनके द्वारा यह व्रत सौभाग्य प्राप्ति के लिए रखा जाता है।

छत्तीसगढ़ में इस त्यौहार का विशेष महत्व है। महिलाएं तीज के व्रत के लिए अपने मायके जाती हैं और वहाँ व्रत रखती हैं इस व्रत के लिए महिलाएं कई प्रकार के व्यंजन बनाती हैं जैसे कि ठेठरी, खुरमी आदि बनाई जाती है तीज व्रत के दिन महिलाएं सुबह से स्नान कर श्रृंगार कर पूजा पाठ करती हैं सुबह मिट्टी से शिव पार्वती की मूर्ति बनाई जाती है उनका विधि विधान से पूजा अर्चना किया जाता है पार्वती माता को श्रृंगार अर्पित कर फल-फूल मिठाई चढ़ाई जाती है।

रात्रि समय महिलाएं सुन्दर वस्त्र पहनकर सोलह श्रृंगार करके पूजा की जाती है। इसमें रात्रि जागरण का विशेष महत्व होता है रात भर महिलाएं भजन-कीर्तन कर जागरण करती हैं। इसके बाद सुबह में स्नान कर पूजा करती हैं फिर शिव-पार्वती की बनी मूर्ति व पूजा के सामानों का विसर्जन कर दिया जाता है। फिर अपने पति की पूजा आरती कर व्रत तोड़ते है। मायके वाले अपनी बेटियों को ससुराल भेजते समय कई प्रकार की रोटियां दे कर विदाई करते हैं। इस बार भी प्रदेश में कोविड नियमों का पालन करते हुए 9 सितंबर 2021 को तीज का त्यौहार हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।

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