- साल के पत्ते से बने दोना-पत्तल को शुद्धता के लिए त्योहारों, पूजा-पाठ में किया जाता है उपयोग
- गौठानों में भी स्व सहायता समूह की महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए दोना-पत्तल के व्यवसाय से भी जोड़ा गया है
- समूह की महिलाओं को दोना-पत्तल बनाने के लिए मशीन उपलब्ध कराया गया है
जशपुरनगर । जशपुर जिला वनसम्पदा के साथ हरियाली से परिपूर्ण जिला है। यहां बड़ी संख्या में साल बीज, तेन्दुपत्ता, महुआ, चिरौंजी और अन्य वनसम्पदा प्रचूर मात्रा में पाये जाते हैं। यहाॅ की महिलाए साल केे पत्ते से दोना-पत्तल बनाकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। त्यौहारों, पूजा-पाठ में भी शुद्धता के लिए सराई के पत्ते से बने दोना-पत्तल का भी उपयोग किया जाता है। गौधन न्याय योजना के तहत् जिले के गौठानों में भी स्व सहायता समूह की महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए दोना पत्तल के व्यवसाय से जोड़ा गया है। समूह की 11-12 महिलाएॅ मिल करके दोना-पत्तल बनाने का कार्य कर रही हैं और विक्रय से इनको अच्छा-खासा मुनाफा मिलता है।
जिले में मनोरा विकासखंड के घाघरा गौठान, दुलदुला विकासखंड के पतराटोली गौठान, फरसाबहार विकासखंड के साजबहार गौठान और बगीचा विकासखंड के रमसमा गौठान में समूह की महिलाएं दोना-पत्तल बनाने की कार्य कर रही हैं। इसकी मांग भी स्थानीय होटल, हाट-बाजार और दुकानों में भी रहती है और महिलाओं के हाथों से बनाए गए दोना-पत्तल हाथों-हाथ विक्रय हो जाता है। अधिकांश लोग शादी समारोह, सामाजिक कार्यक्रम एवं छोटे-मोटे कार्यक्रम में भी उपयोग करते हैं। किमत कम होने के कारण इसका मांग भी हमेशा बनी रहती है। दोना 50-60 रूपए सैंकड़ा बिकता है। इसी प्रकार एक पत्तल का 1 से 2 रूपए में विक्रय हो जाती है।