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दंतेवाड़ा में 5 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण : पूना मारगेम से बदली जिंदगी

by Bhupendra Sahu

रायपुर बस्तर अंचल में शांति और विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी से जुड़े 5 माओवादियों ने मंगलवार को समाज की मुख्यधारा में वापसी कर ली। इनमें 4 महिला माओवादी शामिल हैं। सभी पर कुल 9 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस लाइन कारली में आयोजित आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास कार्यक्रम के दौरान इन कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने का संकल्प लिया। यह पहल जिले में संचालित पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन अभियान के तहत की गई, जो अब नक्सल प्रभावित युवाओं के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रही है। आत्मसमर्पण करने वालों में पश्चिम बस्तर डिवीजन के एसीएम सोमे कड़ती सहित पार्टी सदस्य लखमा ओयाम, सरिता पोडियाम, जोगी कलमू और मोटी ओयाम शामिल हैं। ये सभी भैरमगढ़ और गंगालूर एरिया कमेटियों से जुड़े हुए थे।

आत्मसमर्पण के बाद कैडरों से मिली अहम सूचनाओं के आधार पर सुरक्षा बलों ने विभिन्न स्थानों पर कार्रवाई करते हुए बड़ी मात्रा में हथियार बरामद किए हैं। इनमें 8 एसएलआर रायफल, 3 इंसास रायफल, 1 कार्बाइन, 1 .303 रायफल और 5 बीजीएल लॉन्चर सहित कुल 40 घातक हथियार शामिल हैं। इसे नक्सल विरोधी अभियानों में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, जिससे माओवादी संगठन की सैन्य क्षमता को गंभीर आघात पहुंचा है।

पूना मारगेम से बदल रही तस्वीर

दंतेवाड़ा जिले में वर्ष 2024 से अब तक 607 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं। यह आंकड़ा बताता है कि पुनर्वास नीति और भरोसेमंद माहौल के चलते नक्सल प्रभावित युवा अब हिंसा छोड़कर विकास की राह अपना रहे हैं। वहीं संयुक्त नक्सल उन्मूलन अभियानों में अब तक 92 माओवादियों की गिरफ्तारी और 54 माओवादियों के मुठभेड़ में न्यूट्रलाइज किए जाने की कार्रवाई भी की गई है। दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जैसे सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा बलों के समन्वित प्रयासों से लगातार दबाव बनाया जा रहा है।

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक ने कहा कि पूना मारगेम पहल का उद्देश्य हिंसा का रास्ता छोड़ने वाले युवाओं को पुनर्वास, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है। यह अभियान न केवल आत्मसमर्पण को प्रोत्साहित कर रहा है, बल्कि बस्तर में स्थायी शांति, विकास और विश्वास का वातावरण भी मजबूत कर रहा है। कार्यक्रम में जिला प्रशासन, पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं का स्वागत करते हुए उन्हें समाज में पुनर्स्थापित करने का भरोसा दिलाया।

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