Home » चेक डैम बना ग्रामीणों की आत्मनिर्भरता का आधार… जल संरक्षण के साथ रोजगार और खेती में आया बदलाव

चेक डैम बना ग्रामीणों की आत्मनिर्भरता का आधार… जल संरक्षण के साथ रोजगार और खेती में आया बदलाव

by Bhupendra Sahu

रायपुर छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के खड़गवां जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत बरदर में विकास का एक सशक्त मॉडल उभरकर सामने आया है। यहां मनरेगा और जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) के अभिसरण से निर्मित चेक डैम ने न सिर्फ जल संरक्षण को मजबूती दी है, बल्कि ग्रामीणों की आजीविका और खेती-किसानी की दिशा भी बदल दी है।

करीब 19 लाख रुपए की लागत से बने इस चेक डैम में मनरेगा से 17 लाख और डीएमएफ से 2 लाख रुपए का योगदान रहा। निर्माण कार्य के दौरान 1070 मानव दिवस सृजित हुए, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार मिला और उनकी आर्थिक स्थिति को सहारा मिला। यह कार्य कलेक्टर डी. राहुल वेंकट और जिला पंचायत सीईओ अंकिता सोम के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक पूरा किया गया।चेक डैम बनने से गांव के आसपास के लगभग 15 किसानों को सीधा फायदा मिल रहा है। पहले जहां किसान केवल एक फसल पर निर्भर थे, वहीं अब वे धान के साथ दूसरी फसल लेने लगे हैं। सब्जी उत्पादन की ओर भी उनका रुझान बढ़ा है, जिससे आय के नए स्रोत खुल रहे हैं।

इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ जल संरक्षण के रूप में सामने आया है। चेक डैम में संचित पानी से भूजल स्तर में सुधार की उम्मीद है। किसान अब सोलर पंप के जरिए सिंचाई कर रहे हैं, जिससे खेती की लागत घटी है और उत्पादन में वृद्धि की संभावना बनी है। मनरेगा और डीएमएफ के इस अभिसरण ने यह साबित कर दिया है कि योजनाओं का समन्वित क्रियान्वयन किस तरह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है। एक ओर जहां निर्माण के दौरान रोजगार मिला, वहीं दूसरी ओर स्थायी जल स्रोत ने किसानों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ाया है। ग्राम पंचायत बरदर का यह चेक डैम अब अन्य ग्राम पंचायतों के लिए एक आदर्श उदाहरण बन गया है।

Share with your Friends

Related Articles

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More