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प्रदेश में आगामी खरीफ सीजन के लिए रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित: कृषि मंत्री रामविचार नेताम

by Bhupendra Sahu

प्रदेश में आगामी खरीफ सीजन के लिए रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित
किसानों से अपील : भूमि धारिता एवं पात्रता अनुसार ही उर्वरक का करें भंडारण, ताकि सभी किसान हो सकें लाभान्वित
वैकल्पिक पौध पोषण के लिए “नील हरित काई” के मदर कल्चर के उत्पादन पर जोर
नैनो उर्वरकों की होगी पर्याप्त उपलब्धता, कम लागत पर अधिक उत्पादन का प्रयास
उर्वरकों की कालाबाजारी पर होगी कड़ी निगरानी और सख्त कार्यवाही
रायपुर । कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा है कि राज्य सरकार ने आगामी खरीफ सीजन के लिए रासायनिक उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में इस तरह की जानकारी संज्ञान में आ रही है कि फास्फेटिक उर्वरक के प्रमुख स्रोत डी.ए.पी. का अनियमित उठाव कृषक भाइयों द्वारा किया जा रहा है, जिससे अन्य कृषकों में प्रतिकूल वातावरण निर्मित होने की संभावना है।

केंद्र तथा राज्य सरकार द्वारा समन्वय से किये जा रहे प्रयासों से राज्य के कृषकों का हित संरक्षण सुनिश्चित किया गया है। कृषक भाइयों से अनुरोध है कि भूमि धारिता एवं पात्रता अनुसार ही उर्वरकों का भंडारण करें ताकि समस्त कृषक अग्रिम भंडारण की योजना से लाभान्वित हो सकें। उन्होंने बताया कि वितरण व्यवस्था को पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने के लिए सरकार ने किसानों को शत-प्रतिशत पहचान पत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि उर्वरकों की कालाबाजारी रुक सके और जरूरतमंदों तक मदद पहुंचे।

मंत्री श्री नेताम ने यह भी कहा कि खरीफ मौसम में उर्वरकों का वितरण एग्रीस्टेक पोर्टल में दर्ज रकबे के आधार पर होगा। यदि इसमें किसी प्रकार की त्रुटि पायी जाती है तो अन्य कृषकों को पर्याप्त उपलब्धता के दृष्टिगत समस्त वैधानिक कार्यवाईयां सुनिश्चित करने के लिए शासन सजग है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा आवश्यक होने पर वैकल्पिक पौध पोषण स्रोतों की व्यवस्था के लिए आकस्मिक कार्य योजना भी तैयार कर ली गई है, ताकि पौध पोषण में किसी प्रकार की कमी ना हो। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा राज्य के लिए चिन्हित “नील हरित काई” के मदर कल्चर के उत्पादन की तैयारी प्रारंभ कर दी गई है तथा माह अप्रैल से इसका वृहद उत्पादन कृषि विज्ञान केंद्रों, शासकीय उद्यान रोपणियों एवं शासकीय कृषि प्रक्षेत्रों में किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि खरीफ मौसम में ज्यादा से ज्यादा कृषकों को इसका कल्चर उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि कृषक इनका उपयोग कर वायुमंडलीय नाइट्रोजन स्थिर कर यूरिया के समरूप पोषक तत्व पौधों को उपलब्ध करा सकें। इसके अलावा, हरी खाद के रूप में वर्गीकृत ढेंचा तथा अन्य दलहनी फसलों के कृषक प्रक्षेत्र में अनुप्रयोग को बढ़ावा देने आवश्यक राशि की व्यवस्था मंडी निधि से की जा रही है। इस हेतु समस्त जिलों को कृषक एवं क्षेत्र चयन के निर्देश दिए गए हैं।

मंत्री श्री नेताम ने बताया कि प्रदेश में उर्वरकों के अवैध भंडारण, अधिक मूल्य पर विक्रय तथा समस्त अन्य गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण हेतु उड़न दस्ता तथा निरीक्षकों की नियुक्ति संबंधी आदेश भी जारी किए जा चुके हैं। नैनो उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता भी प्रदेश में होगी ताकि न्यूनतम कास्त लागत पर प्रति इकाई अधिकतम उत्पादन सुनिश्चित किया जा सके। नैनो उर्वरक के प्रभावी उपयोग के संबंध में कृषकों को जागरूक करने एवं प्रशिक्षण हेतु सघन अभियान चलाया जाएगा।

कृषि मंत्री श्री नेताम ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़, भारत के कृषि परिदृश्य में एक अग्रणी राज्य के रूप में उभरा है, जहाँ धान खरीदी और किसान कल्याण की योजनाओं ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। विगत तीन वर्षों के धान खरीदी के आंकड़ों के अनुसार, राज्य ने न केवल धान खरीदी के अपने पिछले रिकॉर्ड तोड़े हैं, बल्कि किसानों को उनकी उपज का देश में सबसे अधिक मूल्य सुनिश्चित कर एक मिसाल पेश की है। खरीफ सीजन 2025-26 में 142 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी को मिलाते हुए पिछले तीन खरीफ सीजन में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार ने लगभग 437 लाख मीट्रिक टन धान खरीद कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। जिससे किसानों के खाते में लगभग 1 लाख 40 हजार करोड़ से अधिक का भुगतान हुआ है।

गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण उपजे संकट के बीच प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के मार्गदर्शन में आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों को लेकर किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए केन्द्र और राज्य सरकार अलर्ट मोड पर काम कर रही है। इसके लिए केंद्रीय स्तर पर निरंतर उच्चस्तरीय बैठक भी की जा रही है। केन्द्र और राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है, कि किसानों को खाद-बीज और कीटनाशकों की उपलब्धता के लिए किसी प्रकार से दिक्कत की सामना न करना पड़े।

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