नई दिल्ली । ईरान युद्ध के बाद दुनिया में एलपीजी सप्लाई संकट के मद्देनजर केंद्र सरकार ने घरेलू प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बनाए रखने के लिए श्वह्यह्यद्गठ्ठह्लद्बड्डद्य स्द्गह्म्1द्बष्द्गह्य रूड्डद्बठ्ठह्लद्गठ्ठड्डठ्ठष्द्ग ्रष्ह्ल (श्वस्रू्र), 1968 के तहत आपातकालीन प्रावधान लागू किए हैं। सरकार का उद्देश्य ईरान–इजऱाइल–अमेरिका संघर्ष के बीच घरेलू और आवश्यक सेक्टर्स में गैस की सप्लाई बाधित न होने देना है।
श्वस्रू्र क्या है?
श्वस्रू्र यानी श्वह्यह्यद्गठ्ठह्लद्बड्डद्य स्द्गह्म्1द्बष्द्गह्य रूड्डद्बठ्ठह्लद्गठ्ठड्डठ्ठष्द्ग ्रष्ह्ल, 1968, एक ऐसा कानून है जो जरूरी सेवाओं की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करता है। इसके तहत इन सेवाओं में काम करने वाले कर्मचारियों को हड़ताल या काम बंद करने की अनुमति नहीं होती। अगर कोई कर्मचारी इन सेवाओं से जुड़े काम से इंकार करता है, तो सरकार उसे काम पर लौटने का निर्देश दे सकती है।
सरकार ने गैस आपूर्ति चार प्राथमिक सेक्टर्स में बांटी है:
सेक्टर 1:
घरेलू पाइप्ड गैस (क्कहृत्र)
परिवहन के लिए संपीडि़त प्राकृतिक गैस (ष्टहृत्र)
एलपीजी उत्पादन और आपूर्ति
पाइपलाइन कम्प्रेसर ईंधन और आवश्यक संचालन
इन सेक्टरों को पिछले 6 महीनों की औसत खपत का 100त्न गैस उपलब्ध कराई जाएगी।
सेक्टर 2:
उर्वरक प्लांट्स को पिछले 6 महीनों की औसत खपत का 70त्न गैस
गैस केवल उर्वरक उत्पादन के लिए उपयोग होगी और इसका प्रमाण क्कक्क्रष्ट को देना होगा
आवंटित गैस को किसी अन्य यूनिट में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता
सेक्टर 3:
राष्ट्रीय गैस ग्रिड के माध्यम से चाय उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य औद्योगिक उपभोक्ता
पिछले 6 महीनों की औसत खपत का 80त्न गैस उपलब्ध होगी
नियम क्कक्क्रष्ट और इंडस्ट्री कमेटी के समन्वय से बनाए जाएंगे
सेक्टर 4:
सभी सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (ष्टत्रष्ठ) नेटवर्क के औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ता
पिछले 6 महीनों की औसत खपत का 80त्न गैस उपलब्ध, संचालन की उपलब्धता के अनुसार
नियम क्कक्क्रष्ट और इंडस्ट्री कमेटी सहयोग से निर्धारित होंगे
गैस का पुनर्वितरण
जरूरत पडऩे पर प्राथमिक सेक्टर की आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए कुछ सेक्टरों में गैस की आपूर्ति घटाई जा सकती है। उदाहरण के लिए: पेट्रोकेमिकल यूनिट्स, आवश्यकतानुसार पावर प्लांट्स, तेल शोधन कंपनियों को पिछले 6 महीनों की औसत खपत का लगभग 65त्न गैस
केंद्र सरकार ने यह प्राकृतिक गैस (सप्लाई रेगुलेशन) आदेश, 2026 अधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से प्रभावी किया है।
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