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मां की लगन और आंगनबाड़ी की मेहनत रंग लाई

by Bhupendra Sahu

रायपुर बीजापुर जिले के ग्राम तोयनार की दो वर्षीय बालिका श्रृष्टि कुड़ियम आज स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ा रही है। एक समय गंभीर कुपोषण की श्रेणी में आने वाली श्रृष्टि को अब सामान्य श्रेणी में लाने में सफलता मिली है। यह बदलाव आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सतत प्रयास, स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और माता मालती कुड़ियम की जागरूकता का परिणाम है।

श्रृष्टि को कुपोषित पाए जाने के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने नियमित रूप से उसके घर जाकर माता को पौष्टिक आहार, स्वच्छता और बच्चों की देखभाल के संबंध में समझाइश दी। गृह भेंट के दौरान संतुलित भोजन, साफ-सफाई और बच्चों को समय पर पोषण देने की जानकारी दी गई, जिससे परिवार में पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ी।
बेहतर उपचार के लिए श्रृष्टि को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) बीजापुर में भर्ती कराया गया, जहां 14 दिनों तक चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की निगरानी में उसका उपचार किया गया। इस दौरान माता को भी बच्चों के लिए संतुलित आहार तैयार करने और सही पोषण देने की विधि के बारे में प्रशिक्षण दिया गया।
एनआरसी से लौटने के बाद माता मालती कुड़ियम ने स्वास्थ्य कर्मियों की सलाह का पालन करते हुए बच्ची को नियमित रूप से हरी सब्जियां, भाजी, मौसमी फल और संतुलित भोजन देना शुरू किया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा समय-समय पर श्रृष्टि का वजन और ऊंचाई मापकर उसकी निगरानी भी की जाती रही।
निरंतर देखभाल और उचित पोषण के परिणामस्वरूप श्रृष्टि के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ और उसे गंभीर कुपोषण की श्रेणी से निकालकर सामान्य श्रेणी में शामिल करने में सफलता मिली।

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