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मुख्यमंत्री साय के सुशासन में महिलाओं को मिला आत्मनिर्भरता का संबल, बालोद की रोहनी बनीं उद्यमिता की मिसाल

by Bhupendra Sahu

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं प्रदेश की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल पर संचालित महतारी वंदन योजना आज हजारों महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन की नई राह खोल रही है। बालोद जिले के ग्राम खैरडीह की श्रीमती रोहनी पटेल की कहानी इसी परिवर्तन की एक प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बीच इस योजना से मिली सहायता को अवसर में बदलकर अपने जीवन को नई दिशा दी है।

रोहनी पटेल का जीवन लंबे समय तक संघर्षों से भरा रहा। पति की असमय मृत्यु के बाद उनके सामने परिवार की जिम्मेदारियों का बड़ा बोझ आ गया। घर में वृद्ध सास की देखभाल और कॉलेज में पढ़ रहे दो बच्चों के भविष्य की चिंता ने उनकी मुश्किलों को और बढ़ा दिया। सीमित संसाधनों और आय का कोई स्थायी साधन न होने के कारण परिवार का भरण-पोषण करना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया था। कठिन परिस्थितियों के बावजूद रोहनी ने हिम्मत नहीं हारी और बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ संघर्ष करती रहीं।

इसी दौरान राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई। एकीकृत बाल विकास परियोजना देवरी के माध्यम से उन्हें योजना का लाभ मिलने लगा और हर माह मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता राशि ने उनके भीतर आत्मविश्वास जगाया। रोहनी ने इस राशि को केवल घरेलू खर्चों में खर्च करने के बजाय इसे भविष्य के लिए निवेश के रूप में देखने का निर्णय लिया।

लगातार छह से सात महीनों तक प्राप्त हुई किस्तों को उन्होंने सावधानीपूर्वक संचित किया और उसी संचित राशि से अपने खेत में सब्जी उत्पादन का कार्य शुरू किया। उन्होंने बीज, खाद और आवश्यक कृषि उपकरणों की व्यवस्था की और पूरे समर्पण के साथ खेती में जुट गईं। उनकी मेहनत का सकारात्मक परिणाम सामने आया और खेत में उगी ताजी सब्जियों ने उनके जीवन में नई उम्मीदों का संचार कर दिया।

आज रोहनी पटेल अपने खेत में विभिन्न प्रकार की सब्जियां उगाकर आसपास के ग्रामीण बाजारों में बेच रही हैं। इस कार्य से उन्हें नियमित और सम्मानजनक आय प्राप्त हो रही है। सब्जी विक्रय से होने वाली आय से वे अपने परिवार की दैनिक आवश्यकताओं को सहजता से पूरा कर पा रही हैं। उनके बच्चों की कॉलेज की पढ़ाई भी बिना किसी बाधा के जारी है और वे अपनी वृद्ध सास की सेवा-देखभाल भी अच्छे से कर रही हैं। महतारी वंदन योजना से मिली आर्थिक सहायता ने रोहनी के जीवन में केवल आर्थिक संबल ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और उद्यमी बनने की प्रेरणा भी प्रदान की है। आज वे अपने गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन चुकी हैं।

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