रायपुर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि अन्नदाताओं का पसीना सूखने से पहले ही उनके मेहनत का मोल मिलना चाहिए। मोदी की गारंटी को पूरा करते हुए सुशासन की राह पर चलने वाली साय सरकार ने कृषक उन्नति योजना के माध्यम से इस कथन को मूर्त रूप दिया है। अभी होली त्योहार आने को है और किसान भाईयों की मेहनत की एक-एक पाई उन्हें मिल गई है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय 28 फरवरी को बिल्हा ब्लॉक के ग्राम रहंगी में आयोजित वृहद किसान सम्मेलन में कृषक उन्नति योजना के तहत राज्य के अन्नदाताओं को 3100 रूपए प्रति क्विंटल के मान से धान के मूल्य की अंतर राशि 10 हजार 324 करोड़ रूपए के बैंक खातों में अंतरित करेंगे। यह राशि राज्य के 25 लाख 28 हजार किसानों को मिलेगी।
साय सरकार ने लगातार एकमुश्त तीसरी बार यह राशि भुगतान करने जा रही है। इसको मिलाकर राज्य के अन्नदाताओं को कृषक उन्नति योजना के माध्यम से 35 हजार करोड़ रुपए का भुगतान पूरा हो जाएगा। छत्तीसगढ़ सरकार अपने वादे के मुताबिक कृषक उन्नति योजना के आदान राशि का भुगतान होली पर्व के ठीक पहले कर रही है। इसका मतलब यह है कि किसान भाइयों के फाग में कुछ और उत्साह के रंग घुल जाएंगे। होली में किसान भाइयों के साथ फगुआ रंग में स्वयं को रंगने मुख्यमंत्री भी बिल्हा जा रहे हैं।
तीन बार की धान खरीदी और सरकार द्वारा दिये जा रहे अन्य प्रोत्साहनों को देखें तो किसान भाइयों को अब तक लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपए की राशि दी गई है। धान के कटोरे में जबर्दस्त आर्थिक उफान लाने यह राशि कितनी सहायक हुई है इसका पता बजट के आंकड़ों से लगता है। इस बार प्रति व्यक्ति आय का जो अनुमान हुआ वो पिछले साल की तुलना में दस प्रतिशत अधिक है। जहां महंगाई लगभग 3 फीसदी की दर से बढ़ रही है और प्रति व्यक्ति आय इतनी तेजी से बढ़ रही है तो साफ है कि किसानों के लिए अपने खेत में निवेश के अवसर भी तेजी से सामने आ रहे हैं।
कृषक उन्नति योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ के किसानों को पूरे भारत में धान का सबसे अच्छा दाम मिल रहा है। यह स्वामीनाथन कमेटी की उन अनुशंसाओं के मुताबिक है, जो किसान भाइयों को उचित मूल्य देने की बात करते हैं। कृषक उन्नति योजना ने केवल किसान भाइयों को मजबूत आर्थिक स्थिति ही नहीं दी है इसने कृषि अर्थव्यवस्था की नींव को भी मजबूत करने का काम किया है।